रायपुर। बस्तर–बलांगीर–महासमुंद (बीबीएम) क्षेत्र में सक्रिय वेस्ट सब-जोनल संगठन से जुड़े सेक्रेटरी विकास ने अपने 14 साथियों के साथ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेते हुए पुनर्वास स्वीकार किया। इसे क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से सक्रिय यह समूह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। सरकार की पुनर्वास नीति और विश्वास निर्माण प्रयासों से प्रभावित होकर विकास और उसके साथियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने कहा कि सभी को शासन की पुनर्वास नीति के तहत नियमानुसार सहायता, प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्र में विकास कार्यों को भी गति देगा। बस्तर संभाग लंबे समय से उग्रवाद की चुनौती से जूझता रहा है, ऐसे में यह पहल अन्य भटके युवाओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश है।
प्रशासन ने विश्वास जताया कि सरकार की संवेदनशील और समावेशी नीति के चलते अधिक से अधिक युवा हिंसा का मार्ग छोड़कर शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेंगे। यह पुनर्वास पहल शांति, विश्वास और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक मानी जा रही है।