रायपुर, 1 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में MR-43 नगर विकास योजना के तहत जमीन के बदले दिए जाने वाले अंतिम भूखंड को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार और रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप से जुड़ी कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को योजना के माध्यम से असामान्य लाभ पहुंचाया जा रहा है। कांग्रेस ने दावा किया कि कचना स्थित कंपनी की लगभग 1.33 एकड़ जमीन के बदले सड्डू क्षेत्र में करीब 23,327 वर्गफीट का प्रस्तावित अंतिम भूखंड दिया जा रहा है, जिसकी कीमत सड़क निर्माण के बाद 20 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला और शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुमार शंकर मेनन ने राजीव भवन में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में इस मामले को उठाया। कांग्रेस नेताओं ने जमीन के स्थान, प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई और भूखंड आवंटन के आधार पर योजना की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
कचना की जमीन के बदले सड्डू में प्लॉट देने पर सवाल

कांग्रेस के अनुसार, मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं। कंपनी की मूल जमीन कचना के नालापारा क्षेत्र में खसरा नंबर 658/2 पर स्थित बताई गई है। कांग्रेस का दावा है कि इस जमीन तक पहुंचने वाली सड़क काफी संकरी है, जबकि इसके बदले सड्डू क्षेत्र में बलौदाबाजार रोड के पास लगभग 23,327 वर्गफीट का अंतिम भूखंड प्रस्तावित है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित भूखंड MR-43 योजना की 45 मीटर चौड़ी सड़क के निकट स्थित है। उनके मुताबिक, सड़क और आसपास के व्यावसायिक विकास के बाद इस भूखंड का बाजार मूल्य काफी अधिक हो सकता है। पार्टी ने सवाल किया कि मूल जमीन की स्थिति और प्रस्तावित अंतिम भूखंड की लोकेशन में इतना अंतर क्यों है।
एक किलोमीटर की दूरी और कानूनी प्रावधानों का हवाला
कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50(3)(ii) का हवाला देते हुए मूल भूखंड के पुनर्गठन और आसपास के भूखंडों के हस्तांतरण से अंतिम भूखंड तैयार करने संबंधी प्रावधानों पर सवाल उठाए।
पार्टी का आरोप है कि मूल भूमि और प्रस्तावित अंतिम भूखंड के बीच लगभग एक किलोमीटर की दूरी है। कांग्रेस ने पूछा कि किस वैधानिक प्रावधान के तहत मूल जमीन से इतनी दूर अंतिम भूखंड देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर राज्य के मुख्य सचिव को दो पत्र भेजे गए हैं, लेकिन उनके अनुसार अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन चयन पर भी सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कंपनी की मूल जमीन को नगर विकास योजना में सार्वजनिक सुविधाओं के लिए शामिल किया गया है, जबकि इसके बदले व्यावसायिक क्षेत्र के निकट अंतिम भूखंड प्रस्तावित है।
पार्टी ने RDA से पूछा कि कंपनी की लगभग 1.33 एकड़ जमीन को योजना में शामिल करना क्यों जरूरी था और इसके लिए कौन-सी तकनीकी रिपोर्ट, जमीनी सर्वे या योजना संबंधी मापदंड आधार बने। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि यदि योजना में 12 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कें प्रस्तावित हैं, तो संबंधित कंपनी को 45 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क के पास भूखंड देने का आधार क्या है।
कांग्रेस ने की स्वतंत्र जांच की मांग
प्रदेश कांग्रेस ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि जांच पूरी होने तक योजना को अंतिम रूप देने और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
कांग्रेस ने मंत्री केदार कश्यप से मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की मांग भी की। पार्टी ने कहा कि यदि जांच में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप साबित होते हैं, तो मंत्री, उनकी पत्नी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने योजना के उद्देश्य और RDA की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि जब प्राधिकरण का गठन जनहित में विकास के लिए किया गया है, तो योजना से होने वाले कथित बड़े आर्थिक लाभ का आधार क्या है।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेंद्र वर्मा, वंदना राजपूत, वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह, अजय साहू और मीडिया कोऑर्डिनेटर ऋषभ चंद्राकर उपस्थित थे।