भाजपा नेताओं के प्रकरण वापस कराने में गृहमंत्री की इतनी तत्परता, जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई पर मौन क्यों : धनंजय सिंह ठाकुर

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रायपुर/ 01 अक्टूबर 2026/ प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा भाजपा नेताओं पर दर्ज प्रकरणों की वापसी के लिए जिस तत्परता से बैठक कर रहे हैं और प्रकरण वापस लेने पर सहमति दे रहे हैं, उससे साफ है कि सरकार को अपने नेताओं की चिंता है। लेकिन सवाल यह है कि जेलों में बंद उन आदिवासियों की चिंता कब होगी, जिन पर नक्सली होने या नक्सलियों का सहयोग करने के संदेह में प्रकरण दर्ज किए गए हैं?गृहमंत्री बताएं कि भाजपा नेताओं के प्रकरणों की वापसी के लिए सरकार के पास समय है, लेकिन जेल में बंद आदिवासियों की न्यायपूर्ण सुनवाई और रिहाई पर चर्चा के लिए समय क्यों नहीं है! क्या आदिवासी होना ही उनका अपराध है!

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार यदि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के मामलों में कानून के तहत राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया चला सकती है, तो संदेह के आधार पर जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों के मामलों की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है? जिनके खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं हैं, उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें न्याय दिलाने की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार नक्सलवाद के खात्मे का दावा करती है, लेकिन नक्सलवाद के नाम पर जेलों में बंद आदिवासियों और उनके परिवारों की पीड़ा पर उसकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। जिन परिवारों के सदस्य वर्षों से जेल में हैं, उनके घरों का चूल्हा बुझ रहा है, बच्चे अपने परिजनों की राह देख रहे हैं और परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि गृहमंत्री विजय शर्मा को भाजपा नेताओं के प्रकरणों की वापसी के साथ-साथ जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों की भी समीक्षा के लिए तत्काल बैठक बुलानी चाहिए। सरकार यह स्पष्ट करे कि कानून सबके लिए बराबर है या फिर भाजपा नेताओं के लिए अलग कानून और गरीब आदिवासियों के लिए अलग कानून?आदिवासियों को न्याय कब!

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