रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NMDC लिमिटेड में करोड़ों रुपये के चिकित्सा उपकरणों के टेंडर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। धमतरी की मेसर्स हरी स्टोर्स पर कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज और फर्जी शपथ पत्र के आधार पर टेंडर हासिल करने के आरोप लगे हैं। मामले में जहां NMDC ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है, वहीं राज्य के स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, NMDC के हैदराबाद मुख्यालय स्थित चीफ विजिलेंस ऑफिस ने शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर आधिकारिक रूप से मामला दर्ज कर लिया है। इसके बाद बचेली और किरंदुल परियोजना अस्पतालों में जारी करीब 16.76 करोड़ रुपये के सीटी स्कैन टेंडरों की तकनीकी और प्रशासनिक जांच शुरू कर दी गई है। NMDC की इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है।हालांकि प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि NMDC की जांच केवल उसके अपने प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी।

वहीं पूरे मामले की जड़ बताए जा रहे कोंडागांव के कथित फर्जी दस्तावेज और उसके आधार पर जांजगीर-चांपा में लगभग 5 करोड़ रुपये के Customized AMC/CMC एवं Modular OT टेंडर की जांच का अधिकार छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग के पास है।बताया जा रहा है कि इस संबंध में जांजगीर-चांपा कलेक्टर, कोंडागांव कलेक्टर, स्वास्थ्य संचालक और स्वास्थ्य सचिव को विस्तृत शिकायत ई-मेल के माध्यम से भेजी गई, लेकिन अब तक राज्य स्तर पर किसी जांच की घोषणा नहीं हुई है।इस बीच, छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी स्वास्थ्य विभाग में ब्लैकलिस्टेड और विवादित कंपनियों को करोड़ों रुपये के टेंडर दिए जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठ चुका है।


ऐसे समय में इस मामले पर प्रशासन की चुप्पी कई नए सवाल खड़े कर रही है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर सकता है, तो राज्य का स्वास्थ्य विभाग और संबंधित जिला प्रशासन अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? क्या जांजगीर-चांपा के कथित 5 करोड़ रुपये के टेंडर की फाइलें खुलने से विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सामने आने का डर है, या फिर जांच में हो रही देरी के पीछे कोई और वजह है?नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं।
संबंधित फर्म या अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।