रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। करीब एक घंटे के भाषण में उन्होंने सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए दावा किया कि “ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ की सरकार कोई अदृश्य शक्ति चला रही है।
आखिर किसके इशारे पर सरकार चल रही है?”भूपेश बघेल ने कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का जवाब “घिसा-पिटा” था और सरकार ढाई वर्षों में कोई नई उपलब्धि नहीं गिना सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान खाद के लिए भटक रहे हैं, धान खरीदी व्यवस्था चरमरा गई है, कानून-व्यवस्था बिगड़ चुकी है और सरकार जनता के बजाय सिर्फ प्रचार में व्यस्त है।

खाद संकट पर सरकार को घेरा:-
बघेल ने कहा कि प्रदेश में डीएपी की भारी कमी है और किसान मजबूरी में महंगी खाद खरीद रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कृत्रिम संकट पैदा किया जाता है, फिर निजी बाजार में ऊंचे दामों पर खाद बिकती है। उन्होंने दावा किया कि हर बोरी पर किसान को सैकड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कानून-व्यवस्था पर सवाल :-
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकार पर उसके अपने विधायकों को भरोसा होता तो सीतापुर में तहसीलदार की पिटाई जैसी घटनाएं नहीं होतीं। उन्होंने बलौदाबाजार, आगजनी, हत्या और अवैध रेत खनन जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में अपराध बढ़े हैं और कई मामलों में निष्पक्ष जांच नहीं हो रही।
जंगल, आदिवासी और खनन का मुद्दा :-
बघेल ने तमनार और हसदेव के जंगलों में कटाई का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि आदिवासियों की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून कांग्रेस सरकार ने लागू किया था और वर्तमान सरकार आदिवासी हितों की अनदेखी कर रही है।
स्वास्थ्य और वित्तीय स्थिति पर भी हमला:-
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है, मेकाहारा जैसे बड़े अस्पतालों की स्थिति खराब है और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से दवाइयां खरीदी जा रही हैं। साथ ही कहा कि सरकार अनुपूरक बजट तक नहीं ला सकी, जिससे वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
‘सरकार को सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार नहीं’:-
अपने भाषण के अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव में उठाए गए 136 बिंदु सरकार की विफलताओं का प्रमाण हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता विरोधी फैसले ले रही है और “साय सरकार को एक मिनट भी सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।”