दो जून की रोटी बनी सामाजिक समरसता का माध्यम, समाजसेवियों ने साझा किया भोजन और संवाद

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रायपुर। सामाजिक संस्था नवसृजन मंच की अभिनव पहल “दो जून की रोटी” के तहत आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक सरोकारों को मजबूत करना, आपसी संवाद बढ़ाना तथा समाज में भाईचारे और समरसता की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।कार्यक्रम में सभी सहभागी अपने-अपने घरों से विभिन्न प्रकार के व्यंजन लेकर पहुंचे और एक साथ बैठकर भोजन साझा किया। इस दौरान समाज और जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया। आयोजन में पारिवारिक अपनत्व, भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता की सुंदर झलक देखने को मिली।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में हमें उन पारंपरिक मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने भारतीय समाज को सदियों तक एकजुट बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज के लोगों का साथ बैठकर भोजन करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है।उन्होंने कहा कि “दो जून की रोटी” केवल भोजन साझा करने की पहल नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और सामाजिक चेतना को सशक्त बनाने का मंच है। जब लोग एक साथ बैठते हैं तो वे केवल भोजन ही नहीं, बल्कि अपने विचार, अनुभव और आत्मीयता भी साझा करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता और भाईचारे को नई मजबूती मिलती है।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज को जोड़ने वाली प्रेरणादायी पहल बताया तथा भविष्य में भी इसे निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।इस अवसर पर अमरजीत सिंह छाबड़ा, जसप्रीत सिंह सलूजा, किशोर महानंद, कांतिलाल जैन, विनय शर्मा, मनीषा सिंह, डॉ. प्रीति सतपथी, प्रीति दास मिश्रा, सीमा कांटकर, सोनल शर्मा, अर्चना वोरा, रेखा शर्मा, नंदिनी ढाके, गौरव दुबे एवं सविता मौर्य सहित प्रदेश की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रमुख और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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