नई दिल्ली, 20 जुलाई। छत्तीसगढ़ में नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 210 दिनों से आंदोलनरत डीएड अभ्यर्थियों ने अब अपनी लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है। अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डालकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार युवाओं को न्याय नहीं दे सकती तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि न्यायालयों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग की उदासीनता और सरकार की निष्क्रियता के कारण हजारों प्रशिक्षित युवा महीनों से सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं।
राष्ट्रीय आंदोलनों से जोड़ा संघर्ष:-
दिल्ली पहुंचे डीएड अभ्यर्थियों ने अपने आंदोलन को देशभर में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों से जोड़ते हुए जंतर-मंतर पर चल रहे विभिन्न आंदोलनों के प्रति एकजुटता जताई। प्रतिनिधिमंडल ने हाल में नीट परीक्षा से जुड़े विवादों और छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया। साथ ही, उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया।
तीन प्रमुख मांगें :-
केंद्रीय मंत्री आतिफ दें
छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव नियुक्तियों में देरी और न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं होने की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ें।
छत्तीसगढ़ सरकार न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए डीएड अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति पत्र जारी करे।
‘यह सिर्फ नौकरी नहीं, युवाओं के भविष्य की लड़ाई’ :-
आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला नहीं, बल्कि देश के उन लाखों युवाओं की लड़ाई है जो वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक नियुक्ति नहीं मिलती और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
नोट: इस खबर में इस्तीफे की मांग, न्यायालय के आदेशों की अवमानना और अन्य आरोप आंदोलनकारी डीएड अभ्यर्थियों के दावे हैं। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।