रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान आदिवासियों की जमीन की खरीद-बिक्री और कब्जे का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से जशपुर जिले के पत्थलगांव क्षेत्र में वर्ष 2022-23 से जनवरी 2026 तक आदिवासी भूमि के क्रय-विक्रय से जुड़े प्रकरणों की विस्तृत जानकारी मांगी।
विधायक ने पूछा कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170 के तहत कितने मामले दर्ज हुए, ग्रामवार और तहसीलवार उनकी स्थिति क्या है, कितने मामलों में जमीन मूल आदिवासी मालिकों को वापस की गई, कितने प्रकरण लंबित हैं और कितनों का निराकरण हो चुका है। साथ ही अवैध क्रय-विक्रय और कब्जे के मामलों में की गई कार्रवाई का भी ब्यौरा मांगा गया।
मंत्री का जवाब: 19 प्रकरण दर्ज, अवैध खरीदी का मामला नहीं राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने जवाब देते हुए बताया कि पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2022-23 से जनवरी 2026 तक अनुसूचित जनजाति की भूमि अंतरण के कुल 19 प्रकरण धारा 170 के तहत दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आदिवासी भूमि के अवैध क्रय-विक्रय का कोई मामला सामने नहीं आया है।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि 2 प्रकरणों में अवैधानिक कब्जा पाए जाने पर आदिवासी भूमिस्वामियों को जमीन वापस करने का आदेश दिया गया है। वहीं धारा 170(ख) के अंतर्गत आदेशित भूमि में से 1 प्रकरण में डायवर्सन किया गया है।
विधायक का पलटवार: “जमीन वापस नहीं मिली” मंत्री के जवाब पर असंतोष जताते हुए विधायक गोमती साय ने कहा कि जिन आदिवासी मामलों में जमीन वापस मिलनी चाहिए थी, उन्हें अब तक जमीन नहीं मिली है और मंत्री को अपनी जानकारी दुरुस्त करनी चाहिए।
मंत्री का स्पष्टीकरण इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि आदिवासी से गैर-आदिवासी को जमीन हस्तांतरण के लिए कलेक्टर की अनुमति आवश्यक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरी क्षेत्रों में धारा 170(ख) लागू नहीं होती, जबकि यह प्रावधान आदिवासी जमीन के संरक्षण के लिए बनाया गया है।
कवर्धा का मामला भी उठा भाजपा विधायक भावना बोहरा ने कवर्धा जिले में आदिवासियों की जमीन की कथित गलत खरीद का मामला भी सदन में उठाया और मंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।
पूर्व सीएम का बयान इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने भी कहा कि आदिवासियों की जमीन कोई भी व्यक्ति कहीं भी नहीं खरीद सकता, चाहे वह ग्रामीण क्षेत्र हो या शहरी इलाका—कानून सभी जगह लागू होता है।
➡️ कुल मिलाकर, विधानसभा में आदिवासी जमीन की सुरक्षा, नियमों के पालन और जमीनी हकीकत को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।