रायपुर : विश्वविद्यालय के तानाशाही रवैये का एनएसयूआई करता है विरोध।
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा 6 मई को जारी निर्देश, जिसमें 15 मई तक स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पूर्ण करने की बात कही गई है, वह पूरी तरह से अव्यवहारिक है और छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय है।
छात्रों की वास्तविक स्थिति यह है कि बीते छह महीनों में कई विभागों में न तो नियमित कक्षाएं संचालित हुईं और न ही विषयवार शिक्षक की नियुक्ति हो सकी। अब ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 15 दिनों के भीतर पाठ्यक्रम पूरा करने की बात करना केवल एकतरफा निर्णय और तानाशाही थोपने जैसा है।
एनएसयूआई यह स्पष्ट करता है कि छात्रों को बिना पढ़ाई के परीक्षा में बैठाना न केवल उनके अकादमिक प्रदर्शन को प्रभावित करेगा, बल्कि मानसिक दबाव भी उत्पन्न करेगा। इससे छात्रों के कम अंक आने की संभावना बढ़ेगी, जिससे उन्हें ATKT लगेगी और फिर से परीक्षा फॉर्म भरने की बाध्यता होगी—यह सीधे-सीधे विश्वविद्यालय प्रशासन के राजस्व को बढ़ाने का तरीका प्रतीत होता है।
हम विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग करते हैं कि जब तक सभी विभागों में पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित नहीं हो जाती और छात्रों को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं दिया जाता, तब तक सेमेस्टर परीक्षाओं की तिथि को आगे बढ़ाया जाए। अन्यथा, एनएसयूआई छात्रहित में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।छात्रहित सर्वोपरि है — यदि तिथि नहीं बढ़ाई गई, तो संघर्ष तय है!