रायपुर : बसंत पंचमी महोत्सव एवं सरस्वती पूजा तथा सम्मान समारोह कार्यक्रम रायपुर के एक आश्रम में आयोजित किया गया था।
माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी सारस्वत नवरात्रि कहलाती है और बसंत पंचमी इसका सर्वोत्तम पर्व है, ज्ञान की इच्छा रखने वाले इस नवरात्रि में महा सरस्वती जी की उपासना करते हैं। बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान विद्या एवं कला की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की उपासना का सर्वोत्तम पर्व है। नवरात्रि चार प्रकार की होती है दो गुप्त एवं दो प्रकट। गुप्त नवरात्रि में की गई साधना दिव्य अनुभूति प्राप्त कराती है। इस नवरात्रि की पंचमी अर्थात बसंत पंचमी विशेष इसलिए भी है क्योंकि इसमें बालकों का विद्यारंभ भी होता है लेखनी एवं पुस्तक का पूजन होता है जो सरस्वती का प्रतीक है। भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी भी अनन्त फल प्रदान करने वाली है ये श्री यंत्र की अधिष्ठात्री है इनकी पूजन से भोग और मोक्ष दोनों प्राप्त होते हैं अर्थात जब तक हम संसार में है तब तक सभी प्रकार का ऐश्वर्य हमें प्राप्त होता है और अन्त में परम पद प्राप्त होता है।।
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर महा सरस्वती पूजन के साथ परम पूज्य १००८ यतिप्रवर दण्डी स्वामी डां इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज का सम्मान समारोह प्रबुद्ध जनों एवं गुरु परिवार के सभी भक्तों द्वारा किया जा रहा है। इसअवसर पर भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी का विशेष पूजन ,श्री यंत्र पूजन,गुलाब पुष्पों से सहस्त्रार्चन, रुद्राभिषेक एवं लेखनी-पुस्तक पूजन किया गया। इस अवसर पर सभी गुरु परिवार के भक्तों द्वारा परम पूज्य १००८ यतिप्रवर दण्डी स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज का सम्मान किया गया।