रायपुर। छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम के प्रदेश सहसंयोजक विकास मरकाम ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा ‘आदिवासी’ और ‘जनजाति’ शब्दों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर कड़ा प्रहार किया है। मरकाम ने कहा कि बैज अपनी पार्टी के डूबते राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए अब शब्दों के जाल बुनकर ओछी राजनीति पर उतर आए हैं।
उन्होंने कहा कि हमको जनजाति पहचान संविधान निर्माताओं ने बहुत सोच समझ कर प्रदान किया है और इस जनजाति शब्द से अब कांग्रेस का गुरेज संविधान और बाबा साहब अंबेडकर का अपमान है।छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष मरकाम ने कहा कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में सदैव ‘जनजाति’ समाज की गौरवशाली भूमिका और संस्कृति का ही चिंतन किया जाता रहा है। ‘आदिवासी’ शब्द तो विदेशी सोच से ग्रस्त वामपंथियों द्वारा भारतीय जनजाति समाज के समृद्ध और गौरवपूर्ण इतिहास से आने वाली पीढ़ियों को अनभिज्ञ रखने के एक गहरे षड्यंत्र के तहत गढ़ा गया है।
मरकाम ने कांग्रेस नेतृत्व से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि आखिर कांग्रेसियों को भारतीय संस्कृति से जुड़े ‘जनजाति’ शब्द से इतनी एलर्जी किसलिए है? कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए श्री मरकाम ने कहा कि वस्तुतः कांग्रेस का पूरा इतिहास जनजाति समाज के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक शोषण की कलंक-कथा से भरा पड़ा है। जिस जनजाति समाज के नाम पर कांग्रेस आज घड़ियाली आँसू बहा रही है और प्रलाप कर रही है, उसी समाज का कदम-कदम पर अपमान करना कांग्रेस का वास्तविक राजनीतिक चरित्र रहा है।छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष मरकाम ने कहा कि याद दिलाया कि कांग्रेस ने हमेशा जनजातीय नेतृत्व को दबाने और उन्हें हाशिये पर धकेलने का काम किया है।
छत्तीसगढ़ में स्व. महेन्द्र कर्मा और अरविन्द नेताम जैसे कद्दावर नेताओं से लेकर देश के विभिन्न राज्यों में पी.ए. संगमा जैसे अनेक प्रमुख जनजाति नेताओं को कांग्रेस ने या तो हाशिये पर धकेल दिया या उन्हें अपमानित कर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। जब-जब जनजाति समाज का कोई नेता स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ा, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने उसे कुचलने का ही काम किया। मरकाम ने कहा कि एक तरफ कांग्रेस का शोषणकारी इतिहास है, तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की सरकारों का समर्पण है।
पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनजाति समाज के सम्मान और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए अलग से ‘जनजातीय कार्य मंत्रालय’ का गठन किया और छत्तीसगढ़ व झारखण्ड जैसे राज्यों का निर्माण कर जनजातीय अस्मिता को नई पहचान दी। वहीं, वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में जनजाति समाज के सर्वतोमुखी कल्याण और उत्थान के लिए ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद (राष्ट्रपति) पर एक जनजातीय महिला
द्रौपदी मुर्मू को आसीन कर पूरे समाज का गौरव बढ़ाया गया। भगवान बिरसा मुण्डा की जयन्ती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में घोषित कर देशभर के जनजातीय नायकों के बलिदान को सम्मान दिलाया गया।
जनजातीय कल्याण के बजट में अभूतपूर्व वृद्धि की गई। ‘पीएम-जनमन’ योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का विस्तार, और 90 से अधिक वनोपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कर जनजाति समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है।छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष मरकाम ने कहा कि दीपक बैज और कांग्रेस पार्टी को यह समझ लेना चाहिए कि अब देश और प्रदेश का जनजाति समाज जागरूक हो चुका है। कांग्रेस के झूठे प्रलाप और षड्यंत्रों में अब कोई आने वाला नहीं है।