रायपुर। बस्तर संभाग में दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार व्यापक पुनर्वास अभियान चलाने जा रही है। इसके तहत जगदलपुर और दंतेवाड़ा में वृहद दिव्यांग शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में जरूरतमंदों को कृत्रिम अंग, ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। नक्सल हिंसा और आईईडी विस्फोटों में अपने अंग गंवा चुके नागरिकों के पुनर्वास को इस अभियान में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिविरों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र हितग्राही सहायता से वंचित न रहे। इसके लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से हितग्राहियों की अंतिम सूची तैयार करने तथा आईईडी विस्फोटों से प्रभावित दिव्यांगजनों का अलग से विवरण संकलित करने को कहा गया है।
जगदलपुर में 5 से 7 अक्टूबर तक शिविर
बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह ने बैठक में शिविरों की प्रशासनिक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर में 5 से 7 अक्टूबर तक तीन दिवसीय शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग जिलों के चयनित हितग्राही शामिल होंगे।
- 5 अक्टूबर: बस्तर जिले के हितग्राही
- 6 अक्टूबर: नारायणपुर और कोंडागांव जिले के हितग्राही
- 7 अक्टूबर: कांकेर जिले के हितग्राही
जगदलपुर शिविर के लिए कुल 2,953 हितग्राहियों को चिह्नित किया गया है। वहीं, दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन परिसर में 15 से 17 अक्टूबर तक शिविर लगाया जाएगा। इसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के 846 हितग्राहियों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। दोनों शिविरों में कार्यक्रम प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शुरू होगा।1
मौके पर बनेंगे दिव्यांगता प्रमाण पत्र
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने निर्देश दिए कि जिन हितग्राहियों के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए शिविर स्थल पर ही स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग के माध्यम से प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इससे पात्र लोगों को उपकरण प्राप्त करने में परेशानी नहीं होगी।शिविरों में जयपुर से आने वाली विशेषज्ञ तकनीकी टीम नए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के साथ पुराने कृत्रिम अंगों की मरम्मत भी करेगी। दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए संबंधित जिला प्रशासन द्वारा निःशुल्क परिवहन और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। हितग्राहियों को पहचान के लिए आधार कार्ड की प्रति सहित अन्य पहचान प्रमाण और दो पासपोर्ट आकार के फोटो साथ लाने होंगे।
पेयजल, स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
शिविर स्थलों पर छाया, शुद्ध पेयजल, शौचालय, निर्बाध बिजली आपूर्ति और सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण के तहत बीपी और शुगर की जांच भी की जाएगी। दिव्यांगजनों की सहायता के लिए स्काउट-गाइड के स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत होगा प्रचार-प्रसार
उप मुख्यमंत्री ने इन शिविरों को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत व्यापक स्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रेस वार्ता, सोशल मीडिया और स्थानीय प्रभावशाली लोगों के माध्यम से अभियान का प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंदों तक भी इसकी जानकारी पहुंच सके।
उन्होंने भविष्य की कार्ययोजना के तहत ग्राम सभाओं के माध्यम से गांवों में सुरक्षा सत्यापन कर उन्हें ‘आईईडी-मुक्त ग्राम’ घोषित करने की दिशा में भी तेजी से काम करने पर जोर दिया। अभियान का उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित नागरिकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन को बेहतर बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पुलिस महानिरीक्षक, संभाग के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा स्वास्थ्य एवं नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कलेक्टर आकाश छिकारा ने शिविर की तैयारियों की जानकारी दी। कलेक्टोरेट स्थित एनआईसी कक्ष में पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।