नई दिल्ली। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मुहम्मद इशाक डार ने भारत को चेतावनी दी है कि सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को आवंटित पानी से उसे वंचित करने की कोई भी कोशिश क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। डार ने यह बयान 28 अगस्त को वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के एक वर्चुअल सेमिनार में दिया।
पाकिस्तान लगातार मांग कर रहा है कि भारत सिंधु जल संधि को बहाल करे और संधि के तहत जरूरी सहयोग एवं हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करे। डार ने कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों और हितों की रक्षा ।

भारत का पलटवार—आतंकवाद के साथ पानी पर ‘सामान्य’ सहयोग नहीं
पाकिस्तान की चेतावनी के बाद भारत सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने साफ कर दिया है कि इस्लामाबाद आतंकवाद का रास्ता जारी रखते हुए भारत से संधि के तहत पहले जैसी व्यवस्था और डेटा-शेयरिंग की उम्मीद नहीं कर सकता।स्
सूत्र के मुताबिक, जल सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। पाकिस्तान यदि भारतीय नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाना जारी रखता है तो वह भारत से बिना किसी जवाबी कदम के पूरी तरह सहयोग की अपेक्षा नहीं कर सकता।
यानी नई दिल्ली का संदेश साफ है—आतंकवाद और सामान्य जल सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते।
ब्रिटेन में भी उठाया था मुद्दा
इशाक डार हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु जल संधि का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं। ब्रिटेन में विदेश मंत्री डेविड लैमी से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने भारत द्वारा संधि को ‘अबेयंस’ में रखने का मुद्दा उठाया था।
पाकिस्तान का तर्क है कि भारत का कदम संधि के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। वहीं भारत ने सिंधु जल संधि को अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘अबेयंस’ में रखने का फैसला किया था और तब से उसका रुख रहा है कि सीमा पार आतंकवाद समाप्त होने तक पुराने ढर्रे पर सहयोग संभव नहीं है।
‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते’ पर कायम भारत
सिंधु जल विवाद अब सिर्फ पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह भारत-पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और रणनीतिक हितों से सीधे जुड़ चुका है।
भारत का मूल संदेश वही है—‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते।’ पाकिस्तान जहां अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संधि बहाल करने और डेटा साझा करने की मांग कर रहा है, वहीं भारत आतंकवाद को जल सहयोग से अलग करके देखने को तैयार नहीं दिख रहा।