रायपुर/कांकेर :7 जुलाई। बस्तर में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद अब सुरक्षाबलों ने “IED मुक्त बस्तर” का बड़ा अभियान तेज कर दिया है। विकास कार्यों के बीच सबसे बड़ी चुनौती जंगलों और ग्रामीण मार्गों में वर्षों पहले नक्सलियों द्वारा बिछाए गए लैंडमाइन और आईईडी हैं, जिन्हें खोजकर निष्क्रिय किया जा रहा है।

कांकेर जिले में सर्चिंग अभियान के दौरान सुरक्षाबलों की बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS) ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 38 आईईडी बरामद कर मौके पर ही सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज कर दिए। पूरी कार्रवाई सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए की गई।जानकारी के अनुसार, पहले नक्सली जवानों की आवाजाही वाले रास्तों पर आईईडी लगाकर उन्हें निशाना बनाते थे। माओवादी गतिविधियों के कमजोर होने के बाद भी ये विस्फोटक जंगलों और अंदरूनी इलाकों में खतरा बने हुए हैं। इन्हें हटाना अब सुरक्षाबलों की प्राथमिकता बन गया है, ताकि आम नागरिकों और विकास कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
बस्तर में तेजी से सड़क, पुल और पुलिया निर्माण के साथ शासन की पहुंच अब दूरस्थ गांवों तक बढ़ रही है। ऐसे में सुरक्षाबल लगातार जंगलों की सघन तलाशी लेकर पुराने आईईडी को खोज रहे हैं और मौके पर ही नष्ट कर रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में कभी जाने से लोग डरते थे, वहां अब आम नागरिक बेखौफ आवाजाही कर रहे हैं। सुरक्षाबलों का मानना है कि नक्सल मुक्त बस्तर के बाद अब IED मुक्त बस्तर बनाना ही अगला बड़ा लक्ष्य है, जिससे विकास की रफ्तार और तेज होगी।