रायपुर पुलिस की डिजिटल छलांग,गुढ़ियारी थाने में शुरू हुआ ‘ई-मालखाना’ : IPS मयंक गुर्जर

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रायपुर : 07जुलाई2026,पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के नेतृत्व में डीसीपी नॉर्थ आईपीएस मयंक गुर्जर कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी व तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार नवाचार कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में क्षेत्र में पुलिसिंग व्यवस्था मजबूत हुई है, अपराध नियंत्रण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई हो रही है और अपराधियों में कानून का स्पष्ट भय देखने को मिल रहा है। ‘ई-मालखाना’ जैसी आधुनिक पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।”।

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने अपराध अनुसंधान और अभिलेख प्रबंधन को हाईटेक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। थाना गुढ़ियारी में सोमवार को अत्याधुनिक “ई-मालखाना” प्रणाली का शुभारंभ किया गया। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए अब थाने में जब्त किए गए सामान का बारकोड आधारित रिकॉर्ड, डिजिटल पंजीयन और रैकवार वैज्ञानिक संधारण किया जाएगा, जिससे जप्त माल की निगरानी पहले से अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हो सकेगी।पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला (IPS) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले (IPS) ने इस नई प्रणाली का शुभारंभ किया।

यह नवाचार डीसीपी नॉर्थ ज़ोन के मार्गदर्शन में थाना गुढ़ियारी प्रभारी और मालखाना स्टाफ के संयुक्त प्रयासों से विकसित किया गया है।शुभारंभ के दौरान अधिकारियों को ई-मालखाना प्रणाली का लाइव डेमो दिखाया गया। इसमें बताया गया कि किस प्रकार जब्त वस्तुओं का डिजिटल पंजीयन, बारकोड से पहचान, रैकवार वर्गीकरण और सॉफ्टवेयर के माध्यम से उनकी लोकेशन व रिकॉर्ड को कुछ ही सेकंड में ट्रैक किया जा सकेगा।

इस अवसर पर डीसीपी नॉर्थ मयंक गुर्जर (IPS), डीसीपी वेस्ट संदीप पटेल (IPS), एडिशनल डीसीपी आकाश मरकाम तथा एसीपी पूर्णिमा लामा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।ई-मालखाना लागू करने से पहले थाने में रखे समस्त जब्त माल का भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके बाद सभी वस्तुओं को A1, A2, B1, B2 जैसी श्रेणियों में रैकवार व्यवस्थित किया गया और प्रत्येक पर बारकोड लगाकर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया।नई प्रणाली के लागू होने से अब जब्त सामान को जमा करने, निकालने और खोजने की प्रक्रिया तेज, व्यवस्थित और समयबद्ध होगी। साथ ही प्रत्येक वस्तु की “चेन ऑफ कस्टडी” सुरक्षित रहेगी तथा उसकी लोकेशन, मूवमेंट और रिकॉर्ड की डिजिटल निगरानी संभव होगी, जिससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ेगी।रायपुर पुलिस की यह पहल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है और भविष्य में अन्य थानों के लिए भी यह मॉडल बन सकती है।

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