नायब तहसीलदार से मारपीट मामले पर कांग्रेस का प्रदर्शन, राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

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अंबिकापुर। सीतापुर के नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट और उसके बाद राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों की हड़ताल से उत्पन्न स्थिति को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक के नेतृत्व में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को सरगुजा कलेक्टर से मुलाकात कर राज्यपाल के नाम दो सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सीतापुर में स्थानीय विधायक और उनके समर्थकों द्वारा नायब तहसीलदार के साथ की गई मारपीट तथा उसके बाद उत्पन्न हालात प्रदेश में संवैधानिक तंत्र की विफलता को दर्शाते हैं। पार्टी ने राज्यपाल से हस्तक्षेप करते हुए प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है।ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 27 मई को सीतापुर के राजापुर में स्थानीय विधायक और उनके समर्थकों ने एसडीएम की मौजूदगी में एक नायब तहसीलदार के साथ कथित रूप से मारपीट की थी। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है। घटना के विरोध में राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी विधायक एवं उनके समर्थकों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हड़ताल के कारण नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, भूमि माप-जोख, आय, जाति, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खरीफ सीजन से ठीक पहले शुरू हुई हड़ताल ने ग्रामीण क्षेत्रों में समस्याओं को और बढ़ा दिया है।जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि अपराध दर्ज होने के बावजूद विधायक और उनके समर्थकों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने इसे अराजक स्थिति बताते हुए कहा कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है और राष्ट्रपति शासन की आवश्यकता महसूस हो रही है।पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि एक सप्ताह से अधिक समय से राजस्व विभाग के कामकाज ठप पड़े हैं और जनता कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल की हठधर्मिता के कारण यह टकराव पैदा हुआ है।वहीं, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि कानून को हाथ में लेना किसी जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि सीतापुर विधायक को स्वयं आगे बढ़कर हड़ताली अधिकारियों और कर्मचारियों से संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि जनहित में समाधान निकल सके।ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें जेपी श्रीवास्तव, राकेश गुप्ता, संजय विश्वकर्मा, शैलेश सिंह, अटल यादव, डॉ. लालचंद यादव, बिगन राम, नरेंद्र विश्वकर्मा, अमित तिवारी राजा, रजनीश सिंह, नीतीश चौरसिया, निकी खान, दीपक मिश्रा, मिथुन सिंह, नरेश बघेल और परवेज आलम गांधी सहित अन्य शामिल थे।

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