टाडमेटला कांड़ और अग्निवेश पर हमले में कल्लूरी को जांच आयोग ने दी क्लीन चिट

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रायपुर। विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दोरनापाल में स्वामी अग्निवेश के साथ घटित घटना की जांच रिपोर्ट भी पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक ताड़मेटला में 160 घर जलाए गए थे। जांच रिपोर्ट न्यायमूर्ति टीपी शर्मा की अध्यक्षता में बनी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आगज़नी के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। रिपोर्ट में तत्कालीन एसएसपी शिवराम प्रसाद कल्लुरी को क्लीन चिट दी गई है। जांच आयोग के मुताबिक स्वामी अग्निवेश के विरोध के लिए एसआरपी कल्लूरी ने किसी को नहीं उकसाया था।

दंतेवाड़ा के चिंतलनार क्षेत्र में 11 मार्च 2011 के दौरान पांच दिन के अंदर ग्राम मोरपल्ली में 31, और तिस्मापुर में 59 और टालमेटला में 160 मकानों को जलाए जाने की घटना कैसे हुई, यहां पर नक्सली मुठभेड़ की घटनाओं और ग्राम में मकानों में आग लगने के कारण क्या थे, इसके लिए कौन जिम्मेदार था। स्वामी अग्निवेश के साथ 26 मार्च 2011 को घटित घटना की जांच का जिम्मा विशेष जांच आयोग को सौंपा गया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने 277 साक्षियों का बयान 100 बिन्दुओं के प्रश्नावली के आधार पर लिया। बताया गया है कि दंतेवाड़ा क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों के साथ ज्यादती को लेकर मानवाधिकार आयोग में 10 से अधिक शिकायतें की गई थी। शिकायतों की जांच के लिए गई पुलिस बल के साथ नक्सली मुठभेड़ के बाद इन ग्रामों में मकानों का आग लगाई गई।
पुलिस बल पर नक्सलियों का हमला
जांच आयोग को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डीएस मरावी ने अपने बयान में कहा कि मानवाधिकार आयोग में की गई 9 शिकायतों की जांच के लिए भारी दबाव था। पुलिस 11 मार्च 2011 को ग्राम मोरपल्ली में जांच करने जा रही थी तभी नक्सलियों से अटैक किया। पुलिस ने अपनी ओर से गोलीबारी और यूजीबीए ग्रनेड दागे गए। इससे 4-5 मकानों को क्षति पहुंची। लेकिन यहां पर 31 लोगों के घर जलाए गए। इसी तरह 13 और 14 मार्च को तिस्मापुरम ग्राम में मनवाधिकार आयोग की जांच करने पुलिस बल जा रहा था उन पर भी नक्सलियों ने हमला किया। हमले में 3 पुलिस जवान और 1 नक्सली मारा गया। 8 पुलिस जवा घायल हुए। इस गांव में घटना के बाद 59 मकानों आगजनी की घटना हुई। तालमेटला में 16 मार्च को 160 मकानों के जलाए जाने की घटना प्रकाश में आई। आग किसने लगाई इसके संबंध कोई जानकारी नहीं मिल पाई। साक्ष्य में कोई विशेष जानकारी सामने नहीं आई।
नक्सली समर्थक मानकर ग्रामीणों ने किया हमला
जांच आयोग ने कहा है कि पूरी घटना को देखा जाए तो स्वामी अग्निवेश के बस्तर दौरे के दौरान वे ग्रामीणों से मिलकर उनकी सहायता करना चाहते थे। ग्रामीण स्वामी अग्निवेश को नक्सलियों का समर्थक बताकर उनका विरोध कर रहे थे। 26 मार्च को पुलिस को सूचना दिए बगैर स्वामी अग्निवेश ताड़मेटला और दोरनापाल रवाना हुए। उनकी सुरक्षा तारकेश्वर पटेल के द्वारा की जा रही थी। वहां पर 1000 से ज्यादा ग्रामीण उनके विरोध के लिए एकत्रित हुए थे। भीड़ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। भारी सुरक्षा के चलते उन्हें वहां से बचाकर सुकमा ले जाया गया। जांच में यह पाया गया कि घटना एसआरपी कल्लूरी व अन्य किसी के द्वारा प्रायोजित नहीं थी।

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