ब्रेकिंग…मेडिकल कॉलेज रायपुर में आज स्वतंत्रता दिवस पर पंडित जवाहरलाल नेहरू के मूर्ति पर एक माला का भी माल्यार्पण नहीं..भूल गए प्रबंधक

Chhattisgarh

चित्रा पटेल : रायपुर : आज देश में 75वें स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है, इस अवसर पर राष्ट्र ध्वज फहराकर तिरंगे को सलाम किया जाता है।

मेडिकल कॉलेज रायपुर में आज स्वतंत्रता दिवस पर पंडित जवाहरलाल नेहरू के मूर्ति पर एक माला का भी माल्यार्पण नहीं हो पाया भूल गए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन स्वतंत्रता दिवस के दिन एक तरफ से स्वतंत्र स्वतंत्रता दिवस पर अपमान है वीर शहीद स्वतंत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का इस प्रकार नहीं होना था।कॉलेज का नाम इसी महान पुरुष के नाम पर है पर भी ध्यान नहीं दिया क्या कॉलेज प्रबंधन के द्वारा।इतनी बड़ी लापरवाही । अधिष्ठाता Dr Vishnu Datt हैं,
अभी वर्तमान में चिकित्सा शिक्षा संचालक प्रभारी के पद पर है।

15 अगस्त 1947 को हमें आजादी मिली थी और आज के दिन हम 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। यह हम सबके लिए बहुत सौभाग्य की बात है। भारत ने दो शताब्दी से अधिक समय तक अंग्रेजों की प्रताड़ना और उनका शासन सहा है। गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए भारत माता के हजारों-हजार सपूतों और सुपुत्रियों ने अपना सर्वस्व त्याग किया। हंसते-हंसते बलि-वेदी पर चढ़ गए। उन वीरों को याद करते ही हमारी नसों में अपने महान पुरखों का खून उबलने लगता है और उन सबके त्याग के बारे में सोचकर आंखें नम हो जाती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ ही एक के बाद एक हजारों चेहरे नजरों के सामने आने लगते हैं। अमर शहीद गैंदसिंह, वीर नारायण सिंह, मंगल पाण्डे, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मी बाई, वीरांगना अवंति बाई लोधी, लाल-बाल-पाल, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, लाल बहादुर शास्त्री, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुुल कलाम आजाद जैसे नामों का एक कारवां बनता चला जाता है। छत्तीसगढ़ के वीर गुण्डाधूर, पं. रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, डॉ. खूबचंद बघेल, पं. सुंदरलाल शर्मा, डॉ. ई.राघवेन्द्र राव, क्रांतिकुमार, बैरिस्टर छेदीलाल, लोचन प्रसाद पाण्डेय, यतियतन लाल, मिनीमाता, डॉ. राधाबाई, पं. वामनराव लाखे, महंत लक्ष्मीनारायण दास, अनंतराम बर्छिहा, मौलाना अब्दुल रऊफ खान, हनुमान सिंह, रोहिणी बाई परगनिहा, केकती बाई बघेल, बेला बाई जैसे अनेक क्रांतिवीरों और मनीषियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज मैं एक बार फिर इन सभी को सादर नमन करता हूं।

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