रायगढ़, 14 अगस्त 2026। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच रायगढ़ पुलिस ने तिलाईपाली स्थित CISF कैंप में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर जवानों को ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी। थाना घरघोड़ा पुलिस की ओर से आयोजित कार्यक्रम में CISF अधिकारियों और जवानों को फर्जी KYC, UPI फ्रॉड, QR कोड, फर्जी निवेश एप, APK फाइल और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के प्रति सतर्क किया गया।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू ने साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए तौर-तरीकों की जानकारी दी।
बैंक अधिकारी बनकर करते हैं ठगी :-
पुलिस ने बताया कि साइबर ठग बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, TRAI, बिजली विभाग, कूरियर कंपनी या रिश्तेदार बनकर फोन करते हैं। इसके बाद डर या लालच पैदा कर OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है। जवानों को स्पष्ट किया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ऐसी संवेदनशील जानकारी साझा न करें।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर ऐंठ रहे पैसे :-
कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट को लेकर विशेष चेतावनी दी गई। पुलिस ने बताया कि ठग वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर किसी अपराध में फंसाने की धमकी देते हैं और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर बैंक खाते में पैसे जमा कराने का निर्देश नहीं देती। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय कॉल काटकर संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना चाहिए।
QR कोड और UPI को लेकर भी किया सावधान :-
पुलिस ने जवानों को समझाया कि UPI PIN पैसा प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान करने के लिए दर्ज किया जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति के कहने पर पैसे प्राप्त करने के नाम पर UPI PIN डालने से बचना चाहिए। फर्जी लिंक, QR कोड, ऑनलाइन खरीद-बिक्री, फर्जी लोन एप और ट्रेडिंग एप के जरिए होने वाली ठगी से भी सतर्क रहने की सलाह दी गई।
APK फाइल बनी साइबर ठगों का नया हथियार :-
साइबर पुलिस ने अनजान WhatsApp मैसेज या अन्य माध्यमों से मिलने वाली APK फाइल इंस्टॉल नहीं करने की सलाह दी। बताया गया कि ऐसी संदिग्ध फाइलों के जरिए साइबर अपराधी मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर बैंकिंग और निजी जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं।
AI वीडियो और आवाज से भी सावधान :-
कार्यक्रम में AI आधारित फर्जी आवाज और वीडियो, नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल तथा परिचित बनकर पैसे मांगने वाले मामलों को लेकर भी जवानों को सतर्क किया गया। पुलिस ने कहा कि केवल आवाज या वीडियो देखकर किसी व्यक्ति की पहचान पर भरोसा न करें। यदि कोई परिचित अचानक पैसे मांगे तो उसके पुराने या वैकल्पिक नंबर पर फोन कर पहले पुष्टि करें।
ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत :-
रायगढ़ पुलिस ने साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की। साथ ही cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की जानकारी दी गई। पुलिस के मुताबिक ठगी के तुरंत बाद शिकायत करने से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और उसे फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।CISF अधिकारियों और जवानों ने साइबर जागरूकता कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप और बचाव के उपायों को गंभीरता से समझा। रायगढ़ पुलिस ने कहा कि आम नागरिकों के साथ-साथ शासकीय विभागों, सुरक्षा बलों और विभिन्न संस्थानों में लगातार साइबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।