रायगढ़/धरमजयगढ़। छाल क्षेत्र की लात खुली खदान में काम कर रही ठेका कंपनी एसकेए (SKA) के खिलाफ मजदूरों की 9 सूत्रीय शिकायत ने प्रशासन को गंभीर कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। श्रमिकों ने वेतन में गड़बड़ी, HPC दर का लाभ नहीं मिलने, वेतन से कथित अवैध कटौती, सुरक्षा उपकरण नहीं देने और शिकायत करने पर नौकरी से निकालने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए रायगढ़ कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने 11 अगस्त 2026 को 5 सदस्यीय संयुक्त जांच दल गठित कर दिया है। खास बात यह है कि जांच केवल लात खदान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिले की अन्य खदानों में कार्यरत ठेका कंपनियों द्वारा श्रम कानूनों के पालन की भी जांच की जाएगी।HPC दर का लाभ नहीं देने का आरोपश्रमिकों का आरोप है कि एसईसीएल की ओर से बजट जारी होने के बावजूद उन्हें निर्धारित हाई पावर कमेटी (HPC) दर के अनुसार वेतन का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा घर से आने-जाने वाले कर्मचारियों के वेतन से कमरे और भोजन के नाम पर कथित तौर पर 6 हजार रुपए तक की कटौती किए जाने की शिकायत भी की गई है।पे-स्लिप और सेफ्टी किट भी सवालों के घेरे मेंमजदूरों ने पे-स्लिप, सेफ्टी किट और बोनस जैसी सुविधाएं नहीं मिलने का भी आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। वहीं, अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले श्रमिकों को नौकरी से हटाने की धमकी दिए जाने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है।5 सदस्यीय टीम करेगी जांचकलेक्टर के आदेश पर गठित संयुक्त जांच दल की अध्यक्ष डिप्टी कलेक्टर शिल्पा भगत होंगी। टीम में सहायक श्रम आयुक्त घनश्याम पाणिग्राही, उप संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा राहुल पटेल, खनिज अधिकारी रमाकांत सोनी तथा संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार को सदस्य बनाया गया है।5 दिन में कार्रवाई नहीं तो काम बंद करने की चेतावनीश्रमिकों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 5 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो छाल उपक्षेत्र में काम पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इससे मामला अब औद्योगिक विवाद की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
प्रशासन ने औद्योगिक शांति, श्रमिकों के वैधानिक अधिकार और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जांच के आदेश दिए हैं।7 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी टीमकलेक्टर के आदेश के अनुसार संयुक्त जांच दल को लात खदान के साथ-साथ जिले की अन्य खदानों में भी श्रम कानूनों के पालन की स्थिति की जांच करनी होगी। टीम को 7 दिनों के भीतर स्पष्ट अनुशंसा के साथ जांच रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी।अब जांच में यह साफ होगा कि मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और ठेका कंपनी ने श्रम कानूनों एवं श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों का पालन किया है या नहीं। प्रशासन की इस व्यापक जांच से जिले की अन्य खदानों में काम कर रही ठेका कंपनियों पर भी शिकंजा कसने के संकेत मिल रहे हैं।