चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने रायपुर के बड़े मंच पर दिखाई प्रतिभा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बढ़ाया हौसला

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रायपुर। विष्णु देव साय सरकार के सुशासन और ग्रामोद्योग विभाग की पहल से छत्तीसगढ़ में एक नई और प्रेरक मिसाल सामने आई। सुकमा जिले के चिंतलनार की पुनर्वासित (आत्मसमर्पित) बेटियों ने पहली बार राजधानी रायपुर के बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक कर आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और बदलाव की सशक्त तस्वीर पेश की।रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के अंतर्गत फैशन शो में चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने मिस इंडिया ईस्ट अनुष्का सोन के साथ रैंप वॉक किया।

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों से सजी इन बेटियों की आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।इस अवसर पर पुनर्वासित बेटियों पुनेम देवे, माड़वी देवे, श्रीमती माड़वी माल्ले, श्रीमती मिडियम गांगी, कुमारी माड़वी नान्दनी, कुमारी डोंडी रामे, कुमारी माड़काम भीमे, कुमारी पोड़ियाम राजे, कुमारी पुनेम ज्योति एवं कुमारी हिड़मे मारकाम ने रैंप वॉक में हिस्सा लिया।यह आयोजन महज एक फैशन शो नहीं था, बल्कि हिंसा से विकास, भय से विश्वास और भटके हुए जीवन से सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की सशक्त अभिव्यक्ति रहा। कभी संघर्ष और हिंसा से प्रभावित क्षेत्र की इन बेटियों का राजधानी के प्रतिष्ठित मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करना पुनर्वास और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है।

ग्रामोद्योग विभाग की इस अभिनव पहल की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सराहना की। दोनों ने मंच पर पहुंचकर पुनर्वासित बेटियों से मुलाकात की और उनकी प्रतिभा एवं आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए उनका हौसला बढ़ाया।चिंतलनार की इन बेटियों की यह प्रस्तुति बताती है कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर संघर्ष से निकलकर नई पहचान बनाने की क्षमता हर व्यक्ति में होती है। ग्रामोद्योग और हथकरघा जैसी पहलें न केवल स्थानीय कला और संस्कृति को मंच देती हैं, बल्कि पुनर्वासित जीवन को सम्मान, स्वावलंबन और नई उम्मीद से जोड़ने का काम भी कर रही हैं।रायपुर के इस मंच पर चिंतलनार की बेटियों का आत्मविश्वास से भरा कदम छत्तीसगढ़ के उस बदलते स्वरूप की तस्वीर बनकर सामने आया, जहां हाथों में हुनर है, आंखों में सपने हैं और भविष्य में नई उम्मीद है।

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