रायपुर/28 जुलाई 2026। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य और केंद्र सरकार पर एक साथ तीखा हमला बोला है। उन्होंने खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, खाद की किल्लत और युवाओं पर कार्रवाई जैसे कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में खंड वर्षा के कारण खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि 16 जून से स्कूल खुल गए, लेकिन आज तक कई बच्चों को न तो बस्ता मिला है और न ही ड्रेस। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत में ईस्ट इंडिया कंपनी थी अब भाजपा सरकार में वेस्ट इंडिया कंपनी बिजली में लुट मचाए हुए है, साय की योजना अडानी का स्मार्ट मीटर और उसमें अंबानी का चिप लगाकर संगठित लूट मचाए हुए हैं, छत्तीसगढ़ के एक पत्रकार को 9 लाख का बिल इसी महीने थमाया गया है, गर्मी से ज्यादा बिल बरसात में आ रहे हैं, बिजली बिल की अधिक वसूली से हर वर्ग प्रभावित है, जन आक्रोश है, कवर्धा जिले के पांडातराई में आम जनता घरों, दुकानों और खेतों में जबरिया लगाए गए स्मार्ट मीटर को उखाड़कर फेक रहे प्रदर्शन कर रहे हैं। बिजली उपभोक्ताओं से अत्याचार के बाद अब मीटर रीडरों को भी निकलने की तैयारी है, वे भी आंदोलित हैं। स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ता परेशान हैं और मीटर रीडरों की नौकरियां भी खत्म हो गई हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पूरे प्रदेश में खाद की बेहद कमी है , कल मैं गरियाबंद गया था, वहां भी किसान यही शिकायत कर रहे थे कि डीएपी नहीं मिल रहा, यूरिया नहीं मिल रहा कवर्धा में अधिकारी जांच करने गया, वहां उसकी पिटाई हो गई। दोगुने तिगुने दाम पर खाद की कालाबाजारी हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जंतर मंतर देश भर का युवा प्रदर्शनकारियों का केंद्र था, सरकार को झुकने पड़ा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा, उसी समय बीजेपी का पोस्ट आया शेर दो कदम पीछे कब हटता हैं, उसकी असलियत अब सामने आने लगी है। बिहार और बंगाल में सैकड़ों बच्चे जेलों में डाले गए। बिहार में एके 47 चला।अभी तक राजनैतिक दल के लोग उद्योगपति टारगेट में थे, अब जैन जी के बच्चों को टारगेट कर रहे हैं, देश में नया दौर आ रहा सरकार के टारगेट में जैन जी है। सरकार में बैठे लोगों ने जो सिखाया, वही सामने आ रहा 12 सालों में जिस भाषा का प्रयोग भाजपा के नेता मंत्रियों ने किया, बच्चे उसी भाषा का प्रयोग कर रहे। मैं उस भाषा का समर्थन नहीं करता, लेकिन भाजपा की ट्रॉल आर्मी ने विपक्ष के लिए जिस भाषा का प्रयोग किया बच्चे वही सिख रहे और उसी भाषा में इस सरकार को जवाब दे रहे हैं। सरकार ने समझौता किया फिर बच्चों के खिलाफ कार्यवाही क्यों कर रही मंत्रियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर वादा किया था कि बच्चों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी फिर क्यों जेल भेजा जा रहा है?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि बस्तर में मलेरिया से मौतें सरकार की अपराधिक लापरवाही है। कांकेर में 10 दिनों में 3 लोगों की मलेरिया से मौत चिंता का विषय है। ढाई सालों में सरकार के द्वारा बरती गयी लापरवाही से एक बार फिर बस्तर में लोगों की मलेरिया से मौतें हो रही है। 6 माह में बस्तर में। 8226 लोगों के मलेरिया से बीमार होने के प्रकरण सामने आये है। बस्तर में मलेरिया और डायरिया से मौते बड़ी समस्या थी। कांग्रेस की सरकार ने 2018 से 2023 के बीच प्रभावी अभियान चलाकर इस पर नियंत्रण पाया था। लेकिन भाजपा की सरकार ने इस दिशा में लापरवाही बरता जिसका दुष्परिणाम सामने आ रहा है। मलेरिया मुक्त अभियान केवल कागजो में चल रहा है। सरकार के द्वारा बांटी जा रही मेडिकेटेड मच्छरदानी नहीं बाटी जा रही है। सरकार बस्तर के लोगो के जीवन से खिलवाड़ कर रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के पांच साल के दौरान हाट बाजार क्लिनिक और मेडिकेटेड मच्छर दानियों के वितरण से बस्तर सरगुजा कवर्धा जशपुर के आदिवासी अंचलों मे मलेरिया और डायरिया से लोगों कि मौतों मे विराम लग गया था। बहुत ही दुर्भाग्य जनक है कि ढाई सालों में ही साय सरकार ने दूरस्थ अंचलों की स्वास्थ्य सेवाओं को बंद कर दिया है। स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की उपलब्धता नहीं है तो दुर्भावना पूर्वक हाट बाजार क्लीनिक योजना को बंद कर दिया। इस योजना के माध्यम से आदिवासी अंचल में लोगों को सहज प्रारंभिक इलाज मिल जाता था।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों का सिर्फ नाम नहीं बदला गया, बल्कि वहां फीस भी ली जाने लगी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की हॉट बाजार क्लीनिक और शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना को बंद कर दिया गया, जिससे गरीबों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हुई है। उन्होंने बस्तर में बढ़ते मलेरिया के मामलों और कांकेर में तीन मौतों से प्रमाणित है कि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने में नाकाम हो चुकी है।