ऑपरेशन के बाद गई जच्चा की जान! 1.50 लाख वसूले, कागजात तक नहीं दिए, गौरेला पेंड्रामरवाही के निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप

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गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही : पेंड्रा गौरेला मरवाही जिला क्षेत्रवासियों के लोकप्रिय कलेक्टर डॉ संतोष कुमार देवांगन को कलेक्टर पद से हटाकर मंत्रालय ट्रांसफर किया गया है। यह वही कलेक्टर है जिसने ज्वाइनिंग करते ही 2026 मई महीने में चल रहे प्रदेश के 33 जिलों में महाअभियान जनगणना प्रथम चरण में 25 दिनों में डॉक्टर संतोष देवांगन ने विशेष टीम बनाकर कर अभियान चलाकर दिन रात एक कर गौरेला पेंड्रामरवाही जिले को प्रदेश में पहला स्थान पर लाया था।

एक खबर यह भी है कि अवैध खनन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई,लाखों लाखों रुपए की चलानी कार्यवाही कर सरकार को राजस्व की फायदा कराई थी। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कलेक्टर डॉक्टर संतोष कुमार देवांगन के बनने के बाद गौरेला पेंड्रामरवाही जिला की स्थिति में सुधार आया ,जनता में खुशियों की माहौल थी क्योंकि जनता को राज्य सरकार और केंद्र सरकार के योजना से सीधा सीधा जुड़ रहे थे जनता, लेकिन अचानक से आखिर क्या हुआ कि रातों रात कलेक्टर हटा कर दूसरा कलेक्टर को बैठा दिया गया। यह क्षेत्र की जनता के बीच गंभीर चर्चा बनी है।

आइए हाल में हुई घटना बताते हैं :-

यह घटना 24 जून 2026 की है। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में निजी अस्पताल की कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। सेमरा स्थित डी.डी. हॉस्पिटल के खिलाफ एक मृतिका के पति ने गौरेला थाने में लिखित शिकायत देकर इलाज में लापरवाही, डेढ़ लाख रुपये की अवैध वसूली और आवश्यक दस्तावेज नहीं देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। शिकायतकर्ता आनंद सिंह (35), निवासी ग्राम जिल्दा (तहसील सकोला), ने बताया कि उनकी पत्नी लीलावती (35) को प्रसव पीड़ा होने पर पहले जिला अस्पताल जीपीएम ले जाया गया था। वहां से बिलासपुर रेफर किए जाने के बाद साधनों के अभाव और पत्नी की गंभीर स्थिति को देखते हुए 5 जून 2026 की रात करीब 12 बजे उन्हें सेमरा स्थित डी.डी. हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा।अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए बेटे का जन्म हुआ, लेकिन अगले ही दिन सुबह से प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। शिकायत के अनुसार, उसे लगातार झटके आने लगे, पूरे शरीर और पेट में सूजन आ गई और वह दो दिनों तक बेहोश रही।

आनंद सिंह का आरोप है कि अस्पताल संचालक अखिलेश तिवारी ने इलाज के नाम पर पहले 1 लाख रुपये जमा कराए। इसके बाद हालत बिगड़ने पर 60 हजार रुपये और मांगे गए, जिनमें से 50 हजार रुपये उन्होंने भुगतान किए। इस तरह अस्पताल ने कुल 1.50 लाख रुपये वसूल लिए।पीड़ित का आरोप है कि 16 जून तक अस्पताल में भर्ती रखने के बावजूद जब मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ तो अस्पताल प्रबंधन ने उसे कहीं और ले जाने की बात कह दी। इतना ही नहीं, अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए एक कागज पर यह लिखवाकर हस्ताक्षर करा लिए कि मरीज को परिजन अपनी इच्छा से घर ले जा रहे हैं।

आनंद सिंह के अनुसार, दो दिन घर पर रखने के बाद पत्नी की तबीयत और बिगड़ गई। 19 जून को उन्हें जिला अस्पताल जीपीएम में भर्ती कराया गया, जहां उसी दिन दोपहर करीब 3 बजे डॉक्टरों ने लीलावती को मृत घोषित कर दिया।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि डी.डी. हॉस्पिटल ने न तो डिस्चार्ज समरी दी, न इलाज और दवाइयों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध कराया और न ही डेढ़ लाख रुपये की कोई पक्की रसीद दी। उल्टा अस्पताल की ओर से बकाया 10 हजार रुपये चार दिनों के भीतर जमा करने का दबाव बनाया गया।

मामले की लिखित शिकायत मिलने के बाद गौरेला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सनीप रात्रे ने कहा है कि शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी। यदि जांच में इलाज में लापरवाही, अवैध वसूली या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। मामले की सत्यता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

यह शिकायत जिला मजिस्ट्रेड और स्वास्थ्य विभाग भी पहुंची:-

प्रशासनन टीम गठित कर जांच में जुटी ,जांच दौरान डी डी हॉस्पिटल की घोर लापरवाही सामने आई, आयुष्मान कार्ड के तहत डी डी हॉस्पिटल में अनाप शनाप पैसा वसूली का मामला भी सामने आया, इसके बाद जिला प्रशासन ने डी डी हस्पिटल की लाइसेंस को अस्थायी रूप से रद्द किया।

सूत्रों के मुताबिक उड़ती हल चल :-

सूत्रों से मुताबिक डी डी हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा अपने हॉस्पिटल के लाइसेंस वापस पाने के लिए संबंधित नेताओं के बंगलों की चक्कर काटने लगा।

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