जगदलपुर। बस्तर शांति समिति के तत्वावधान में रविवार को सिरहासार चौक, जगदलपुर में “सलवा जुडुम स्मृति दिवस” के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, पूर्व सैनिकों, जनजाति समाज के प्रतिनिधियों, नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर माओवादी हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों तथा देश की सुरक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत ग्रामीणों और शहीद सुरक्षा कर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।इस अवसर पर नक्सल विषय की विशेषज्ञ एवं लेखिका रचना नायडू ने बस्तर में माओवादी हिंसा की पृष्ठभूमि, उसके सामाजिक प्रभाव और आम ग्रामीणों पर पड़े दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा ने बस्तर के हजारों परिवारों को प्रभावित किया है और इसके वास्तविक इतिहास को समाज के सामने लाना आवश्यक है।बस्तर शांति समिति के जयराम दास ने कहा कि 5 जुलाई 2011 को सलवा जुडुम पर प्रतिबंध लगने के बाद बस्तर में माओवादी हिंसा का दायरा बढ़ा और अनेक निर्दोष ग्रामीण इसकी चपेट में आए। उन्होंने इस विषय पर व्यापक जनचर्चा और गंभीर अध्ययन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी निष्पक्ष सार्वजनिक विमर्श होना चाहिए।
कार्यक्रम में नक्सल हिंसा से प्रभावित हिड़मु राम भी उपस्थित रहे।नारायणपुर से आए समिति के मंगऊ राम कावड़े ने कहा कि “सलवा जुडुम स्मृति दिवस” किसी संगठन या व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन हजारों निर्दोष ग्रामीणों और वीर सुरक्षा बलों के जवानों की स्मृति का दिवस है, जिन्होंने माओवादी हिंसा के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।वरिष्ठ पत्रकार एवं जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि सलवा जुडुम जनजातीय समाज का नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ा जनआंदोलन था।
उन्होंने इसके निष्पक्ष अध्ययन और दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर बल दिया ताकि आने वाली पीढ़ियां बस्तर के इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से परिचित हो सकें।कार्यक्रम में किशोर पारख और दशरथ कश्यप ने भी माओवादी हिंसा में मारे गए निर्दोष ग्रामीणों एवं शहीद सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाज से हिंसा के सभी पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रहने का आह्वान किया।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने बस्तर में स्थायी शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प लिया।