छत्तीसगढ़ की सत्ता का सफर: जोगी से साय तक, चार मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में बदला प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य, लोकप्रिय कौन ?

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में 4 मुख्यमंत्री रहे । अजीत जोगी, डॉक्टर रमन सिंह, भूपेश बघेल और अभी विष्णु देव साय हैं। इन चारों में कौन लोक प्रिय हैं यह तो जनता ही तय कर सकती है।

वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से अब तक प्रदेश ने चार मुख्यमंत्रियों का नेतृत्व देखा है। हर मुख्यमंत्री ने अपने-अपने कार्यकाल में अलग-अलग प्राथमिकताओं के साथ शासन किया और राज्य के विकास की दिशा तय करने का प्रयास किया।राज्य गठन के बाद अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने नवगठित राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी करने और नई नीतियों की नींव रखने का काम किया। उनका कार्यकाल वर्ष 2000 से 2003 तक रहा।

इसके बाद वर्ष 2003 में डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। डॉ. रमन सिंह लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे और करीब 15 वर्षों (2003 से 2018) तक प्रदेश की कमान संभाली। उनके कार्यकाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सड़क और आधारभूत ढांचे के विकास सहित कई योजनाएं चर्चा में रहीं।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल 2018 से 2023 तक रहा। इस दौरान किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, गौठान, गोधन न्याय योजना और सामाजिक कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं पर सरकार का विशेष फोकस रहा। नरवा गरवा गुरुवा बाड़ी योजना असफल होते नजर आया। कांग्रेस ने कथित ढाई ढाई साल की फार्मूला जमकर वायरल हुआ। भूपेश बघेल और टी एस सिंह देव की कथित टक्कर जनता के निगाहों में तैरता रहा।

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी हुई और विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान सरकार केंद्र और राज्य की योजनाओं के क्रियान्वयन, बुनियादी ढांचे के विकास, सुशासन और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं पर काम कर रही है।छत्तीसगढ़ के 25 से अधिक वर्षों के राजनीतिक सफर में इन चार मुख्यमंत्रियों ने अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदेश का नेतृत्व किया। बदलती सरकारों के साथ विकास की प्राथमिकताएं भी बदलीं, लेकिन राज्य के समग्र विकास और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना हर सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी रही है।

सूत्रों की मुताबिक ,सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के ढाई ढाई साल की फार्मूला अब भाजपा में धरातल में लागू होते नजर आ रहा है।

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