गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 25 जून। जिले के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराने की है। यह बात कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने यूनिसेफ रायपुर के शिक्षा विशेषज्ञ रवि राज दयाल और जिला समन्वयक सरस्वती यादव के साथ आयोजित बैठक में कही।

बैठक में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त सहयोग से संचालित शैक्षणिक कार्यक्रमों, विद्यालय भ्रमण के अनुभवों तथा “आधा फूल” कॉमिक्स पुस्तक पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष क्षमता होती है और विद्यालयों में ऐसा समावेशी एवं प्रेरणादायी वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां बच्चे एक-दूसरे से सीखते हुए अपनी प्रतिभा को निखार सकें।
कलेक्टर ने कहा कि यूनिसेफ के सहयोग से संचालित बालिका शिक्षा कार्यक्रम बच्चों में जीवन कौशल, मानसिक स्वास्थ्य, वित्तीय साक्षरता, साइबर सुरक्षा और लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने समाज में मौजूद लैंगिक रूढ़ियों को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लड़के और लड़कियों दोनों को समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सकें।
उन्होंने माहवारी स्वच्छता प्रबंधन जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा करने और समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने की जरूरत बताई। साथ ही जिले के विद्यार्थियों के लिए प्रभावी करियर काउंसलिंग व्यवस्था विकसित करने, प्रवीण सूची में स्थान प्राप्त छात्रों को अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनाने तथा विज्ञान एवं गणित विषयों में छात्रों की दक्षता बढ़ाने के लिए यूनिसेफ के सहयोग से विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और सामूहिक प्रयासों के जरिए जिले के बच्चों को बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य लगातार जारी रहेगा।