सड़क निर्माण बना विवाद की जड़ : राजपुर में आज जमीन पर छिड़ेगी निर्णायक जंग : रायगढ़

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रायगढ़। जिले के बहुचर्चित बाकारुमा-लैलूंगा सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में जमीन विवाद अब विस्फोटक मोड़ पर पहुंच चुका है। राजपुर गांव की एक विवादित जमीन को लेकर महीनों से simmer कर रहा तनाव अब खुली टक्कर में बदलने जा रहा है। आज 12 जून 2026 को सुबह 10 बजे राजपुर में होने वाला सीमांकन सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे इलाके की नजरों में “आर-पार की लड़ाई” बन चुका है।तहसीलदार लैलूंगा के आदेश के बाद राजस्व निरीक्षक द्वारा जारी नोटिस ने गांव से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल तेज कर दी है। सीमांकन स्थल पर आज माहौल गरमाने की पूरी आशंका जताई जा रही है।विवाद की जड़ क्या है?पूरा मामला राजपुर स्थित खसरा नंबर 380/6 की उस बेशकीमती जमीन का है, जिसका कुल रकबा 0.676 हेक्टेयर बताया जा रहा है। यही जमीन अब सड़क निर्माण के रास्ते की सबसे बड़ी अड़चन बन गई है।इस मामले को साधारण विवाद इसलिए नहीं माना जा रहा क्योंकि इसमें एक-दो नहीं, बल्कि “समस्त ग्रामवासी राजपुर” को ही पक्षकार बनाया गया है। वहीं आवेदक राकेश कुमार (पिता कीर्तन प्रसाद) के साथ सिद्धार्थ, मुकेश, सोमेश और देवमती जैसे कई नाम सामने आने से विवाद और उलझ गया है।गांव में तनाव, प्रशासन पर दबावसूत्रों के मुताबिक, सीमांकन को लेकर गांव में दो धड़े आमने-सामने हैं। एक पक्ष सड़क निर्माण को विकास का रास्ता बता रहा है, तो दूसरा पक्ष जमीन अधिकारों के हनन का आरोप लगा रहा है।सबसे बड़ी बात यह है कि मामले पर मीडिया और पत्रकार संगठनों की भी पैनी नजर बनी हुई है। दस्तावेजों में “राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के प्रदेश सचिव” का उल्लेख सामने आने के बाद यह विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई से निकलकर सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन गया है।कानूनी जंग के लिए तैयार ‘फौज’मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीमांकन स्थल पर कानूनी तैयारी भी पूरी कर ली गई है।

सूत्र बताते हैं कि पक्षकारों की ओर से अधिवक्ताओं की टीम पूरी तरह अलर्ट मोड में है। यदि सीमांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठा, तो यह विवाद सीधे अदालत की चौखट तक पहुंच सकता है।सुबह 10 बजे तय होगी जमीन की ‘असल लकीर’राजस्व निरीक्षक, राजपुर सर्कल ने सभी संबंधित पक्षों, पटवारी और कोटवार को आज सुबह 10 बजे मौके पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। सभी को अपने-अपने भूमि अभिलेखों और दस्तावेजों के साथ बुलाया गया है।आज राजपुर में सिर्फ जमीन की नापजोख नहीं होगी, बल्कि यह भी तय होगा कि सड़क विकास के नाम पर आखिर किसका दावा भारी पड़ता है — प्रशासन का, ग्रामवासियों का या निजी पक्षकारों का।अब सबकी नजरें आज होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि सीमांकन शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो गया तो प्रशासन राहत की सांस लेगा, लेकिन जरा सी चूक पूरे मामले को बड़ा आंदोलन और कानूनी युद्ध बना सकती है।

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