झीरम घाटी नरसंहार के 13 साल: आज भी न्याय अधूरा, जांच एजेंसियों की रहस्यमयी चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

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रायपुर : दिनांक 23 मई 2026,झीरम घाटी नरसंहार आज भी छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्याय व्यवस्था के सामने एक बड़ा और अनसुलझा सवाल बना हुआ है। छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में शामिल झीरम घाटी नरसंहार को आज 13 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। नक्सली हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 30 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, लेकिन मामले की जांच आज भी अधूरी मानी जा रही है।25 मई 2013 को बस्तर जिले की झीरम घाटी (दर्भा क्षेत्र) में कांग्रेस की “परिवर्तन यात्रा” के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर भीषण हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल सहित कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शहीद हो गए थे।घटना के बाद मामले की जांच कई एजेंसियों को सौंपी गई, जिसमें एनआईए और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियां भी शामिल रहीं। हालांकि वर्षों बीत जाने के बाद भी जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हो सका है, और कई अहम सवाल आज भी अनसुलझे हैं।पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने सालों बाद भी न तो वास्तविक आरोपी पूरी तरह पकड़े जा सके हैं और न ही घटना के पीछे की साजिश का पूरा सच सामने आया है। उनका कहना है कि आरोपी आज भी खुले घूम रहे हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।राजनीतिक दलों के स्तर पर भी इस मुद्दे पर लगातार बयानबाजी और रणनीतिक मांगें होती रही हैं, लेकिन ठोस नतीजा अब तक सामने नहीं आया है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्होंने इस मामले की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग को लेकर डिप्टी सीएम विजय शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को पत्र लिखा है। पार्टी का कहना है कि यह एक “सुपारी किलिंग” थी और जनता जानना चाहती है कि इसके पीछे मास्टरमाइंड कौन था और हत्या की साजिश किसने रची।

स्वर्गीय नंदकुमार पटेल छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख और वरिष्ठ कांग्रेस नेता थे। उन्होंने ग्रामीण राजनीति की शुरुआत रायगढ़ जिले के खरसिया विधानसभा अपने गृह ग्राम नंदेली से सरपंच के रूप में की और आगे चलकर विधायक तथा राज्य के गृह मंत्री के पद तक पहुंचे। उनका राजनीतिक जीवन जनसेवा और संगठनात्मक क्षमता के लिए जाना जाता है।मई 2013 में बस्तर के झीरम घाटी में हुए भीषण नक्सली हमले में उनकी तथा उनके पुत्र दिनेश पटेल की जान चली गई । अध्यक्ष नंदकुमार पटेल सहित कुल 32 लोगों की जान गई थी।

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