रायपुर, 29 अप्रैल 2026 — छत्तीसगढ़ में जनजातीय क्षेत्रों के विकास को लेकर सरकार ने बड़ा फोकस तय किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुई जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए।बैठक में साफ संकेत दिए गए कि नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में अब तेज़ी से बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी। “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता के बाद इसका अगला चरण “नियद नेल्ला नार 2.0” जल्द शुरू होगा, जिसके तहत दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क और राशन व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।सरकार ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध अतिक्रमण पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।“धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के जरिए 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, वहीं पीएम जनमन योजना के तहत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के अंतर्गत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच जारी है।बैठक में जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज मामलों की जांच के निर्देश भी दिए गए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजने की तैयारी है।शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए छात्रावासों में सीट बढ़ाने, रखरखाव बेहतर करने और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए तुरंत शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं न चलाने के निर्देश दिए गए।अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में देरी पर नाराजगी जताते हुए काम को समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने को कहा गया। बरसात में कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए।बैठक में यह भी माना गया कि नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद अब दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों तक सीधे लाभ पहुंच रहा है।