सामाजिक बहिष्कार और अवैध वसूली का गंभीर मामला: 200 परिवारों ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

Uncategorized

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG)।जिले के वनांचल क्षेत्रों से सामाजिक बहिष्कार, मानसिक उत्पीड़न और अवैध वसूली का एक गंभीर मामला सामने आया है। ब

ताया जा रहा है कि ‘चंदनहा कलार समाज’ के कुछ पदाधिकारियों द्वारा लगभग 200 परिवारों को न सिर्फ समाज से बाहर कर दिया गया, बल्कि उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव भी बनाया जा रहा है।मंगलवार को जिला अध्यक्ष दीनदयाल सिन्हा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पीड़ित परिवारों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

संविधान के अधिकारों का उल्लंघन का आरोप:-

पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें जबरन मुंडन कराने, कान पकड़कर माफी मांगने और सामाजिक भोज देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15, 17 और 19 का सीधा उल्लंघन बताया है।पीड़ितों के अनुसार, इस संबंध में पहले भी छुईखदान थाने में शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई में देरी के कारण आरोपियों के हौसले बढ़ गए।

शिक्षा और कुरीतियों से मुक्ति बना विवाद की जड़ :-

जानकारी के अनुसार, साल 2023 में साल्हेवारा और वनांचल क्षेत्र के करीब 200 परिवारों ने आपसी सहमति से ‘छत्तीसगढ़ डडसेना कलार समाज’ में विलय कर लिया था। इस कदम का उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देना, आर्थिक उन्नति करना और कुरीतियों (जैसे कम उम्र में विवाह) को खत्म करना था।आरोप है कि इस विलय के बाद चंदनहा समाज के पदाधिकारियों का वर्चस्व खत्म हो गया, जिससे नाराज होकर उन्होंने इन परिवारों का बहिष्कार शुरू कर दिया।

पीड़ितों की दर्दनाक आपबीती:-

पीड़ित पूनाराम सिन्हा ने बताया कि जनवरी 2026 में उनके ससुर के निधन पर उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोक दिया गया। इतना ही नहीं, अंतिम विदाई देने के बदले उनसे 3,000 रुपये का अवैध जुर्माना वसूला गया।वहीं, अन्य पीड़ित भुवनेश्वर सिन्हा पर ससुराल कार्यक्रम में शामिल होने के कारण 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। दुबारू और टुम्मन सिन्हा से भी ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर हजारों रुपये की मांग की जा रही है।पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि उनका सामाजिक संपर्क तक तोड़ दिया गया है और उन्हें दशगात्र जैसे पारिवारिक कार्यक्रमों से वंचित रखा जा रहा है।

प्रशासन से न्याय की उम्मीद :-

पीड़ित परिवारों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप कर उन्हें सम्मान और स्वतंत्रता के साथ जीने का अधिकार दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे अपने ही समाज में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीना चाहते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *