राजनांदगांव : 02 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ की उभरती लोकगायिका और पंडवानी कलाकार तरुणा साहू ने एक बार फिर अपनी दमदार प्रस्तुतियों से राजनांदगांव में सांस्कृतिक समां बांध दिया। लोक मड़ई 2026 (तुमड़ीबोड) और दाऊ मंदरा जी महोत्सव 2026 (रवेली) में उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनाओं की ऐसी यात्रा पर ले गया, जहां हर कोई खुद को महाभारत के बीच खड़ा महसूस करने लगा।
लोक मड़ई में प्रस्तुत “द्रौपदी चीरहरण” प्रसंग ने जहां श्रोताओं की आंखें नम कर दीं, वहीं 1 अप्रैल को मंदरा जी महोत्सव में “द्रौपदी स्वयंवर” की जीवंत प्रस्तुति ने पूरे माहौल को ऐतिहासिक बना दिया। उनकी आवाज़, अभिनय और भाव-भंगिमा ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा—तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही।
खास बात यह है कि तरुणा साहू केवल मंच की स्टार नहीं, बल्कि वर्दी में भी हीरो हैं। वे वर्तमान में रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) में निरीक्षक के पद पर पदस्थ हैं और अपनी ड्यूटी के दौरान अब तक 100 से अधिक लोगों—बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों—को सुरक्षित रेस्क्यू कर चुकी हैं।
गुरु की विरासत, शिष्या का कमाल :-
तरुणा साहू, देश की दिग्गज पंडवानी गायिका तीजन बाई की शिष्या हैं। महज 9-10 साल की उम्र से ही उन्होंने अपने गुरु के साथ देश के बड़े मंचों—दिल्ली, उज्जैन के कालिदास समारोह, भोपाल और अयोध्या—पर प्रस्तुति देकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
पढ़ाई में भी नंबर वन :-
जवाहर नवोदय विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाली तरुणा ने 12वीं में बिजनेस स्टडीज में गोल्ड मेडल हासिल किया। आगे चलकर अपने सब-इंस्पेक्टर बैच में भी गोल्ड मेडलिस्ट बनीं—यानी कला और करियर दोनों में अव्वल।
देशभक्ति और कला का संगम :-
एनसीसी कैडेट के रूप में उनका चयन गणतंत्र दिवस परेड (दिल्ली) के लिए हुआ और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समक्ष भी अपनी प्रस्तुति दी—जो उनके करियर का गौरवपूर्ण क्षण रहा।
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान :-
पंडवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार की नेशनल स्कॉलरशिप (फोक एवं ट्रेडिशनल आर्ट) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
संस्कृति बचाने का संकल्प:-
तरुणा साहू का कहना है कि नई पीढ़ी को महाभारत जैसे महान ग्रंथों से जोड़ना जरूरी है। उनके अनुसार, पंडवानी केवल कला नहीं, बल्कि हमारी पहचान है, जिसे सहेजना हम सबकी जिम्मेदारी है।
प्रेरणा की मिसाल :-
एक ओर जहां वे मंच पर संस्कृति की मशाल जलाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर वर्दी में समाज सेवा का फर्ज निभा रही हैं। तरुणा साहू आज की युवा पीढ़ी के लिए एक ऐसी मिसाल बनकर उभरी हैं, जो साबित करती है कि जुनून और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं।