अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर स्थित संजय पार्क से वन्यजीव संरक्षण को शर्मसार कर देने वाली भयावह घटना सामने आई है। यहां कथित लापरवाही के चलते 15 मासूम हिरणों की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और गहरी चिंता पैदा कर दी है। यह घटना न सिर्फ सिस्टम की बड़ी चूक उजागर करती है, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
रात में खुला रह गया ‘सुरक्षा का दरवाजा’, मौत बनकर घुसे कुत्तेमिली जानकारी के अनुसार, हिरण बाड़े की सुरक्षा में भारी लापरवाही बरती गई। रात के समय बाड़े का गेट खुला रह गया, जिसका फायदा उठाकर आवारा कुत्तों का झुंड अंदर घुस आया। कुत्तों ने हिरणों पर हमला कर दिया, जिसमें 14 हिरणों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक हिरण ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सुबह का मंजर बेहद दर्दनाक था—बाड़े में चारों तरफ बिखरी लाशें और खामोशी।‘सुरक्षित’ पार्क में ही असुरक्षित वन्यजीव!इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब संरक्षित पार्क के भीतर ही वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी नाराजगी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
कार्रवाई शुरू, लेकिन सवाल बरकरारघटना के बाद वन विभाग हरकत में आया और त्वरित कार्रवाई करते हुए—
डिप्टी रेंजर सहित 4 कर्मचारियों को निलंबित किया गया• संबंधित रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए, पार्क बंद, लेकिन जिम्मेदारी से कौन भागेगा !
हुए हादसे के बाद संजय पार्क को आम लोगों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। मृत हिरणों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया।बड़ा सवाल: लापरवाही या सिस्टम की नाकामी !
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों का आईना है। अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी दोहराए जा सकते हैं।
संजय पार्क की यह दर्दनाक घटना प्रशासन और वन विभाग के लिए एक सख्त चेतावनी है—
अब लापरवाही की कीमत बेजुबान वन्यजीवों की जान देकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।