तमनार में ‘कमेटी राज’ पर हाई कोर्ट की सख्ती, चुनी हुई पंचायत फिर काबिज

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बिलासपुर/रायगढ़। तमनार को नगर पंचायत में बदलने की प्रक्रिया पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। अदालत ने उस अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके जरिए चुनी हुई ग्राम पंचायत को हटाकर एक प्रशासनिक समिति को अधिकार सौंप दिए गए थे। आदेश के बाद तमनार ग्राम पंचायत फिर से अपने पूर्ण अधिकारों के साथ कामकाज संभालेगी।

क्या था विवाद :-

राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर तमनार में नगर पंचायत गठन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए धारा 16(1) के तहत एक समिति गठित कर दी थी। याचिका में कहा गया कि यह कदम नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 5(1) की भावना के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट है कि नई नगर पंचायत के चुनाव होने तक मौजूदा ग्राम पंचायत का अधिकार बना रहता है।

कोर्ट में क्या हुआ :-

जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत की ओर से दलील दी गई कि:नियमों की अनदेखी कर जल्दबाजी में समिति गठित की गई,तमनार ‘अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र’ है, जहाँ पंचायतों की शक्तियों में बदलाव संवेदनशील कानूनी मसला है।सरकार की ओर से कहा गया कि यह प्रक्रिया बसंतपाली ग्राम पंचायत के पूर्व प्रस्ताव के आधार पर आगे बढ़ाई गई थी।

हालांकि, अदालत ने इसे अंतरिम राहत रोकने के लिए पर्याप्त नहीं माना और शासन से जवाब तलब किया।आदेश का असर 16 फरवरी 2026 को गठित समिति के अधिकार फिलहाल निष्प्रभावी।सरपंच और पंचों को पूर्ववत अधिकारों के साथ काम करने की अनुमति।अगली सुनवाई तक अधिसूचना पर रोक बरकरार।

क्यों अहम है फैसला :-

यह आदेश स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के अधिकारों की रक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। अदालत का रुख संकेत देता है कि चुनी हुई पंचायतों को हटाकर प्रशासनिक समितियों को अधिकार सौंपने की प्रक्रिया कानून के दायरे में ही होगी।

अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर हैं, जहाँ सरकार को अपने निर्णय का विधिक आधार स्पष्ट करना होगा।

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