रायपुर, 10 जनवरी 2025। राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाव संग्राम के तहत छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने महासमुंद जिला कांग्रेस भवन में पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है। छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार 2 साल में 90 – हजार करोड़ कर्ज ले चुकी है, आर्थिक तंगी के चलते राज्य में विकास कार्य पूरी तरह ढप्प पड़े हैं, राज्य कर्मचारीयों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, फिर भाजपा की डबल इंजिन सरकार 125 दिनों की मज़दूरी का भुगतान कहा से करेंगी।नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है. मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मोदी सरकार ने ‘सुधार‘ के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयो से काम का अधिकार छीनने की जान-बुझकर की गई कोशिश है।नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, अब तक मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल केन्द्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता- जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने ना सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशको से, मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारो के लिए लाइफलाइन रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर जरूरी साबित हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था. श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे. जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया, अब इसे चलाना नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा।नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर सास तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोजगार बंद करने की इजाजत देता है जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते है और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर या फसल के मौसम में, मज़दूरों को महीनों तक रोजगार से दूर रखा जा सकता है।मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60-40 का हो जाएगा, पहले मैचिंग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, मोदी सरकार अब राज्यों पर ‘जी राम जी‘ का लगभग 50,000 करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है। 100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है. वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालो में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालों में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई। एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है। भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर झूठ बोल रही है। “V.B.G.RAM.G.” में जो राम जी बता रहे उसमें कहीं भी भगवान राम नहीं है। “V.B.G.RAM.G.” का फूल फार्म है (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण) है।