सुकमा में बदलते हालात : नक्सलवाद से शांति और विकास की ओर क़दम

Chhattisgarh Madhyapradesh National State

15 September, raipur,कभी नक्सल हिंसा के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले सुकमा में अब विकास और शांति की नई इबारत लिखी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, मज़बूत सुरक्षा तंत्र और जनता की बढ़ती भागीदारी ने जिले को बदलते दौर की ओर अग्रसर कर दिया है। इसी क्रम में पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “नक्सल मुक्त भारत: समृद्धि और एकता की राह” विषय पर आयोजित वार्तालाप (कार्यशाला) में प्रशासन, पंचायत और पुलिस अधिकारियों ने सुकमा के बदलते परिदृश्य को साझा किया।कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी देवेश कुमार ध्रुव ने कहा कि सुकमा आज तेज़ी से विकास और शांति की दिशा में बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत बेघर परिवारों को पक्के मकान मिल रहे हैं, जबकि मनरेगा और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से रोज़गार और आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं। महिलाओं को स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से गाँव-गाँव में स्वच्छता की नई परंपराएँ स्थापित हुई हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ ग्रामीणों की पहुँच में आई हैं और पुनर्वास केंद्रों के ज़रिए आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन मिल रहा है।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुंद ठाकुर ने बताया कि योजनाओं का लाभ अब अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 34,849 परिवारों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 13,776 का निर्माण पूरा हो चुका है। विशेष श्रेणी में आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को भी घर उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत इस वर्ष अब तक 4.11 लाख मानव दिवस का सृजन हुआ है और 92,000 से अधिक श्रमिकों को रोज़गार मिला है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2,747 स्व-सहायता समूह गठित कर 28,829 परिवारों को जोड़ा गया है। सिलाई, डेयरी और शहद उत्पादन जैसी गतिविधियों से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।श्री ठाकुर ने आगे कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत हजारों परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं नक्सल पुनर्वास केंद्रों में अब तक 127 आत्मसमर्पित नक्सलियों को कृषि, उद्यमिता और तकनीकी प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा से जोड़ा गया है। उनका कहना था कि लक्ष्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि जनता की सक्रिय भागीदारी से आत्मनिर्भर और समृद्ध सुकमा का निर्माण है।पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा कि नक्सलवाद ने लंबे समय तक निर्दोष लोगों और जवानों की बलि ली है, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से गाँव-गाँव में कैंप स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार जैसी सुविधाएँ सीधे लोगों तक पहुँच रही हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के अंत के लिए सुरक्षा और एकता सबसे अहम आधार हैं। जनता का भरोसा सुरक्षा बलों पर बढ़ा है और लोग मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि 2026 तक न केवल सुकमा बल्कि पूरा बस्तर और भारत नक्सलवाद से मुक्त होगा।कार्यक्रम के अंत में यह संदेश उभरकर सामने आया कि सुकमा और बस्तर अब भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि शांति, समृद्धि और विकास की नई तस्वीर बन रहे हैं। प्रशासन, पुलिस और जनता के संयुक्त प्रयासों से 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण अंत का लक्ष्य केवल घोषणा नहीं, बल्कि साकार होती हक़ीक़त है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *