एक टीचर ने तो गजब कर दिया,अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर “पीना है तो जीना है” थीम पर बच्चों को डांस कराया गया

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रायपुर : 21जून2025, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक टीचर ने तो गजब कर दिया,योग करने बच्चों को बुलाया और और गाना चलाकर डांस करा डाला। गजब गुरूजी हैं ,स्कूल मे प्रधान पाठक ने”पीना है तो जीना है” गाने मे करा दिया योग, अब कार्रवाई की लटकी तलवार। सरकारी स्कूल में खुला खुला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का उल्लंघन होते साफ दिखाई दे रहा वायरल वीडियो में। पूरा देश योग दिवस मना रही तो इस स्कूल के टीचर योग पर ऐसा गाने के थीम का जमकर मजा लेते नजर आ रहे हैं। ऐसा गाना चलाकर बच्चों को सुनाया जा रहा,इन बच्चों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा इस बात को बच्चों का भविष्य तय करने वाले टीचरों को पहले समझना होगा।

यह घटना छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर जिले के अभनपुर ब्लॉक की प्राथमिक शाला “हसदा नंबर 02” में योग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम विवादित बन गया जब बच्चों को योग कराने के बजाय, विद्यालय के प्रधान पाठक भोज राम साहू और शिक्षिका द्वारा फूहड़ छत्तीसगढ़ी गीत “पीना है तो जीना है” पर डांस कराया गया। इस दौरान बच्चे भी शामिल थे। इस पूरी घटना का वीडियो वायरल होते ही विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और स्कूल, शिक्षा विभाग में सनसनी फैल गई।

वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि प्रधान पाठक और शिक्षिका दोनों मंच पर छात्र-छात्राओं के बीच जमकर थिरक रहे हैं, जबकि पीछे से गानों की आवाज़ आ रही है। आम परंपरागत योगाभ्यास की जगह अश्लील मनोरंजन कार्यक्रम विद्यालय के प्रतिष्ठा और बच्चों की मर्यादा के लिए शर्मनाक साबित हुआ।

इन्हीं कारणों से, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। साथ ही, उन्होंने विद्यालय की अनुशासनहीनता और सनकृत कार्यक्रम को देखते हुए, प्रधान पाठक भोज राम साहू के निलंबन का प्रस्ताव जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा है।

विद्यालय परिसर में इस तरह के अशिक्षाप्रद कार्यक्रम की आलोचना हर स्तर पर हो रही है। अभिभावक, शिक्षक और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बचपन का सही विकास योगाभ्यास और नैतिक शिक्षा से होता है, न कि अश्लील गानों के साथ डांस से। शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग उठ रही है।

इस घटना ने स्कूलों में कार्यक्रम की गुणवत्ता और बच्चों के साथ उचित व्यवहार की जिम्मेदारी पर नए सिरे से चर्चा छेड़ दी है। आखिर ऐसे शिक्षा के गुरु बच्चों को क्या शिक्षा और संस्कार देना चाह रहे है?

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