रायपुर : सरकारी बंगले पर सांसद और एसपी आमने सामने ,छत्तीसगढ़ के पॉश इलाके के एक बंगले को लेकर बीजेपी सांसद और रायपुर ssp आमने-सामने हो गए हैं। शासकीय रहवासी आवास को sp कार्यालय में तब्दील करने का खेला। सांसदों और शासकीय बड़े अधिकारियों को बंगले को लेकर चक्कर काटना पड़ रहा है, बंगले नहीं मिल रहा है, ऐसे स्थिति में रहवासी बंगले पर शासकीय कार्यालय खोलना कितना उचित है यह बात तो सरकार ही समझें।









दरअसल शुरू से बताते हैं आपको , आज ठीक 2 महीने हो गया बंगला विवाद। फरवरी 2025 को छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार ने अपनी पार्टी के राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह को सिविल लाइन इलाके में एक सरकारी बंगले मौखिक रूप आबंटित किया।आवास क्रमांक बी5/12 (21/378) पुराना सिविल लाइन रायपुर स्थित शासकीय आवास है।
जब सांसद महोदय सरकारी बंगले की सफाई करवाने के लिए फरवरी 2025 को अपने कर्मचारियों को भेजे तो सभी यह जानकर दंग रह गए कि यह बंगले जल्दी एसपी ऑफिस में तब्दील होने वाला है और रायपुर के ssp इस बंगले पर अपना दावा जताते हुए साफ सफाई करवा रहे थे। बिना अलॉटमेंट के एसएसपी ने साफ सफाई लिपाई पुताई भी शुरू करवा दिया था । सांसद महोदय के कर्मचारियों को जब इस बात की भनक लगी तो ताला लगाने के लिए बंगले पहुंचे थे,तो देखा कि वहां पहले से ही ताला लगा पाया। उसी समय सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह के कर्मचारी ने सांसद को बताया सारी जानकारी। देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उसी समय सारी बातें सीएम विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा को राज्य सभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताई थी ,जिस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव और गृह मंत्री विजय शर्मा ने आश्वासन दिया कि यह बंगला आपको एलॉट होगा और आप वहां गृह प्रवेश करें। इतना ही नहीं बल्कि एसएसपी रायपुर ने भी राज्य सभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह को कहा था कि हम उस बंगले को छोड़ कर कहीं और ऑफिस के लिए देख रहे हैं। तब 12 फरवरी को राज्य सभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह अपने पूरे परिवार के साथ बंगले का विधिवत पूजा पाठ कर गृह प्रवेश किया और तब से रहने लगे। सांसद के परिवार अब उस बंगले पर रहने लगे हैं। सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह और उनके पत्नी तथा उनके पुत्र ने पूजा पाठ किया , राज्य सभा सांसद देवेंद्र प्रताप एम्स हॉस्पिटल कमेटी के भी सदस्य हैं, आम जनता स्वास्थ्य समस्या के साथ उम्मीद लेकर बंगले आने लगे , सांसद महोदय उस बंगले से लोगों का समस्या का निराकरण करने लगे।फरवरी 2025 से आवास क्रमांक b5/12 (21/378) पुराना सिविल लाइन रायपुर स्थित शासकीय आवास से राज्य सभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह 2 महीने से रह रहे हैं।
- बड़ा सवाल :- यह है कि जब यह बंगले राज्यसभा सांसद देवेंद्र सिंह को 27. 8.24 को अलॉट किया गया था तो आखिर एसपी महोदय ने इस बंगले पर जबरन कब्जा करने की कोशिश कैसे की!
- सवाल :- अगर एसएसपी को फरवरी माह में ही रहवासी बंगले को शासकीय कार्यालय के रूप में एलॉट हो गया था तो तब क्यों नहीं लिए आखिर क्यों छोड़ा!
- सवाल :- आज आवास क्रमांक b5/12 (21/378) पुराना सिविल लाइन रायपुर स्थित शासकीय आवास से राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह को हटाने की और क्यों रहवासी बंगले को एस एस पी कार्यालय बनाने रणनीति क्यों तैयार किया गया!
इस संबंध में फरवरी 2025 को hns 24news ने एसएसपी डॉक्टर लाल उमेद सिंह से मोबाइल व्हाट्सएप कॉल पर जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हम एसपी कार्यालय के लिए मांग कर रहे थे और हमको उम्मीद था कि यह बंगले हमको अलार्ट हो जाएगा, इस कारण से हमने लिपाई – पुताई , साफ- सफाई किया और हमें जानकारी नहीं थी कि सांसद महोदय को यह बंगले अलार्ट हुआ है,अगर उन्हें यह बंगला अलॉट हुआ है तो हम छोड़ देंगे।
फरवरी2025को जब हम इस मामले पर वीडियो बाइट लेने पहुंचे एसपी ऑफिस तो एसपी महोदय ने इस मामले पर बातचीत करना या बाइट देना ,या कोई मैसेज देना मुनासिफ नहीं समझा, घंटों से ज्यादा देर तक एसपी ऑफिस में इंतजार करने के बाद भी एसपी महोदय के तरफ से कोई पॉजिटिव या नेगेटिव मैसेज नहीं आया।
लेकिन सवाल तो यह भी उठता है कि बिना अलार्ट बंगले की साफ सफाई एसपी साहब कैसे करवा दिया , रहवासी बंगले पर 10 फरवरी 2025 में बिना परमिशन के कैसे एसपी ऑफिस खोला जा रहा था, जबकि यह बंगले तो रायगढ़ राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह को 27/8/2024 से अलर्ट की मांग गई थी। पहला आवेदन राज्य सभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने जमा किया था और यह बंगला रहवासी बंगला है, नियम कायदे भी लागू कहां गई।
रायगढ़ राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने 10 फरवरी2025 को इस मामले पर यह भी कहा कि मुझे यह बंगला मिल रहा है, और मैं समझ रहा था कि मेरे लिए साफ सफाई की जा रही है,लेकिन यहां तो मेरे जानकारी के बगैर मेरे बंगले में एसपी ऑफिस खोलने की तैयारी हो चुकी है,जबकि मैने बंगले को छोड़ा ही नहीं है, और मैं अपने परिवार के साथ पूजा पाठ भी किया हुआ हूं।
बता दें कि इस सारे मामले के बाद , फरवरी माह 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आश्वाशन के बाद सांसद ने अपना नेम प्लेट लगाया और बंगले के अंदर एसपी द्वारा किया गया निर्माण ऑफिस काउंटर को हटवाया था।
लेकिन मामला इतना में खत्म नहीं हुआ, अचानक से यह बंगले विवाद ठीक 2 महीने बाद आज अप्रैल में एक बार फिर से शुरू हुआ।सभी मीडिया ने अपने अपने सोच और पहुंच से खबर लगाई।अब एसएसपी को बंगले एलॉट होने की खबर सामने आई। एसएसपी रायपुर एक शासकीय अधिकारी हैं,अपने मन से कुछ नहीं कर सकते,वे बहुत ही सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं और राज्य सभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह भी सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं। फिर आखिर इस बंगले की विवाद क्यों, क्यों ! जनता पूछ रही है।
देवेंद्र प्रताप सिंह रायगढ़ के राजा पुत्र हैं,उस घराने से संबंध रखते हैं जिनके दादा पर दादा ने राजा चक्रधर सिंग को अपना पूरा राज पाठ और सोने की सिंहासन तक सौंप दिया था। आज छोटे से शासकीय बंगले को जो किसी और पर एलॉट हुआ हो इसे छीनने का सवाल ही उत्पन्न नहीं होता है।पूरा रायगढ़वासी उनके स्वभाव से अवगत है। वहीं रायपुर एसएसपी राज्य सभा सांसद को कैसे हटा कर कार्यालय खोलने का फैसला ले सकते हैं यह बात तो खुद वहीं बता सकते हैं।
इस सारी मामले अब प्रदेश से दिल्ली तक पहुंची। क्या यह पूरे मामले एक राजनीति है।
हाल ही में प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम हुआ था जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह विधानसभा अध्यक्ष है । जब मंच पर से उन्होंने संबोधन किया तो अचानक से बिजली चली गई थी,फिर थोड़ी देर में आ गई बिजली, बिजली आने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह ने अपने संबोधन में चुटकी लेते हुए कहा बिजली और राजनीति कभी जोर की झटका दे देते हैं,कभी भी कुछ भी हो सकता है,इसलिए जो जिम्मेदारी मिली है उसे पूरे नीयत से निभाएं ,कभी घमंड न करें अपने पद पर।