पराली जलाने में यूपी और एमपी निकले हरियाणा, पंजाब से आगे

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New Delhi : सूत्रों से मिली जानकारी मुताबिक है खबर। कोई अन्यथा न लें। इस खबर की पुष्टि नहीं करती हमारी संस्थान।

हरियाणा और पंजाब पराली जलाने के मामले में काफी बदनाम हैं। पर अब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश आगे निकलते नजर आ रहे हैं।

सर्दियों की शुरुआत में दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के लिए अक्सर हरियाणा और पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। पराली की आग को लेकर पूरा फोकस हरियाणा और पंजाब के किसानों पर रहता है। जबकि “आईएआरआई” के आंकड़े बताते हैं कि खेतों में आग के मामले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में काफी बढ़े हैं।
दो साल पहले वर्ष 2022 में 15 सितंबर से 25 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पराली जलाने के 561 और 210 मामले सामने आए थे, जो इस साल क्रमशः 849 और 869 तक पहुंच गये हैं। जबकि पिछले दो वर्षों में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 1372 से घटकर 689 रह गई हैं।

हरियाणा-पंजाब में घटे खेतों की आग के मामले

गत वर्षों में पंजाब में भी पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है, हालांकि अब भी पराली की आग के सबसे ज्यादा मामले पंजाब में हैं। साल 2022 में 15 सितंबर से 25 अक्टूबर तक पंजाब में पराली जलाने की 5,798 घटनाएं दर्ज की गई थीं जो 2023 में घटकर 2,704 और 2024 में 1,749 रह गईं।

इस साल धान कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की घटनाएं हरियाणा से ज्यादा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हो रही हैं। खेतों में आग की सेटेलाइट से निगरानी में यह तथ्य सामने आया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा सेटेलाइट रिमोट सेंसिंग निगरानी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस साल 15 सितंबर से 25 अक्टूबर के बीच उत्तर प्रदेश में पराली की आग की 849 और मध्य प्रदेश में 869 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि हरियाणा में इस दौरान 689 घटनाएं हुई हैं। इस दौरान पंजाब में खेतों की आग के सबसे ज्यादा 1749 मामले सामने आए हैं। जबकि राजस्थान में 442 और दिल्ली में 11 घटनाएं हुई।

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