अनियमित कर्मचारियों के नियमितिकरण मामले में मुख्यमंत्री बाेले-विधि विभाग से मांगा अभिमत

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रायपुर। विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने नौकरी देने के नाम पर बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं सच्चाई उससे एकदम अलग है। साढ़े चार लाख नौकरियां दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि 20 हजार 291 लोगों को ही रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि इसके लिए सरकार ने विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव और सचिवों की समिति बनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के संबंध में महाधिवक्ता से 28 मई 2019 को अभिमत मांगा गया है। विधि विभाग से भी इस संबंध में राय मांगा गया है। सदन में सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी भाजपा के सदस्यों ने बहिर्गमन कर दिया।
प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पूछा कि जनवरी 2019 से 31 जनवरी 2022 तक छत्तीसगढ़ सरकार ने कितने व्यक्तियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदों पर नियमित नई नियुक्तियां दी? क्या यह सही है कि अनियमित, संविदा, एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितिकरण के लिए प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है? यदि हां तो समिति की बैठक कब-कब हुई और उसके व्दारा क्या अनुशंसाएं की गईं? धरमलाल कौशिक ने कहा, सभी श्रेणी के पदों को मिलाकर 20 हजार 291 हजार नियुक्तियां हुई हैं। बड़े-बड़े होर्डिंग्स जो लगाकर रखे गए हैं उनमें 4 लाख 65 हजार से अधिक नौकरियां देने के दावे हो रहे हैं। बिलासपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री ने 5 लाख से अधिक नियुक्तियां दिए जाने की बात कही है। आखिर वास्तविक स्थिति क्या है?
साढे 11 हजार पदों में भर्ती, 28 हजार से अधिक प्रक्रियाधीन
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, वर्षवार के हिसाब से 20 हजार 291 पदों पर नियुक्तियों का यह आंकड़ा है। फिर रोजगार केवल शासकीय नहीं होते। श्री कौशिक ने कहा कि रोजगार एवं नौकरी में अंतर होता है। मनरेगा में जो लोग मजदूरी करते हैं उसे भी रोजगार कहा जाता है। आपकी योजनाएं या तो होर्डिंग्स में हैं या अख़बारों में। मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्त विभाग ने 40 हजार 35 पदों की स्वीकृति दी है। इनमें से 11 हजार 494 पदों में भर्ती पूरी कर ली गई है। 28 हजार 541 पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा कार्यकाल से ज्यादा भर्तियां कांग्रेस के कार्यकाल में हो रही हैं। उन्होंने कहा, सचिवों की कमेटी की बैठक में 9 जनवरी 2020 को हुई थी। कमेटी ने विधि विभाग से अभिमत मांगा है। अभिमत अभी अपेक्षित है। 33 विभागों की जानकारी आ गई है। उन्होंने कहा, नियमितिकरण के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से अनुशंसा की गई है। चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है अतः विधि विभाग से परीक्षण कराया जा रहा है। एडवोकेट जनरल से अभिमत मांगा गया है।
दो साल पहले हुई समिति की एक बैठक
कौशिक ने कहा कि सन् 2018 के आपके जन घोषणा पत्र में अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई थी। इसके लिए 2019 में कमेटी बनी। केवल एक बैठक 2020 में हुई। अब तक इस पर रिपोर्ट नहीं आई। इसी से पता चलता है कि सरकार कितनी गंभीर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक कोरोना का प्रकोप रहा। सारे दफ्तर बंद रहे। उससे कहीं न कहीं भर्ती का भी काम प्रभावित रहा। सदस्य शिवरतन शर्मा ने आरोप लगाया कि नौकरियों देने को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है? सरकार इस पर जानकारी उपलब्ध कराना ही नहीं चाहती। मुद्दे पर काफ़ी देर तक सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच तीखी बहस चलती रही। सरकार की ओर से सही जवाब नहीं आने का आरोप लगाते हुए सारे विपक्षी भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।

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