चित्रा पटेल : रायपुर, 29 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग के तहत जमा कराए गए चावल की गुणवत्ता और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता मनोज सिंह ठाकुर ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) से सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब का हवाला देते हुए दावा किया है कि एक जनवरी 2023 से अब तक रायपुर मंडल में 77,402.25 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (CMR) को अमानक बताकर खारिज किया गया है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने, वित्तीय नुकसान की जांच करने और संबंधित मिलरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ठाकुर के अनुसार, FCI के रायपुर मंडल कार्यालय ने 28 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में अमानक चावल की मात्रा की जानकारी दी है। उनका सवाल है कि इतनी बड़ी मात्रा में चावल खारिज होने के बाद संबंधित मिलरों से मानक चावल की वसूली, बैंक गारंटी जब्त करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की क्या स्थिति है।

विजिलेंस जांच नहीं होने पर उठाए सवाल
मनोज सिंह ठाकुर ने दावा किया कि FCI के जवाब के मुताबिक, इस मामले में केंद्रीय सतर्कता दल की ओर से कोई जांच या निरीक्षण नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में चावल अमानक पाए जाने के मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है।
उन्होंने FCI और राज्य की एजेंसी मार्कफेड की भूमिका पर भी सवाल उठाए। ठाकुर का कहना है कि मामले में कार्रवाई की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने के बजाय दोनों एजेंसियों को अपने-अपने स्तर पर जवाबदेही तय करनी चाहिए।
मिलरों की जवाबदेही तय करने की मांग
ठाकुर ने कहा कि कस्टम मिलिंग व्यवस्था में धान से तैयार चावल की गुणवत्ता और समय पर जमा कराने की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। यदि अमानक चावल जमा कराने के मामले में संबंधित मिलरों की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने आशंका जताई कि चावल जमा कराने में देरी और भंडारण की समस्या का असर धान उपार्जन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इस संबंध में वास्तविक प्रभाव और संभावित वित्तीय नुकसान का आकलन जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
CVC, EOW और हाईकोर्ट जाने की तैयारी
मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि संबंधित एजेंसियां मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं करती हैं, तो वे दस्तावेजों के साथ केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW/ACB) में शिकायत दर्ज कराएंगे। उन्होंने पूरे मामले की जांच CBI या किसी उच्चस्तरीय समिति से कराने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की भी घोषणा की है।
ठाकुर ने कहा कि उनका उद्देश्य मामले की निष्पक्ष जांच कराना, सरकारी खाद्यान्न से जुड़े प्रकरण में जवाबदेही तय करना और यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
(रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा अस्वीकृत चावल की मात्रा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मिले जवाब में FCI के रायपुर मंडल कार्यालय ने बताया है कि 1 जनवरी 2023 से 28 अक्टूबर 2026 तक कुल 77,402.25 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (CMR) अस्वीकृत किया गया।
मनोज सिंह ठाकुर द्वारा दायर RTI आवेदन के जवाब में भारतीय खाद्य निगम ने 28 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। आवेदन में अस्वीकृत अथवा निर्धारित गुणवत्ता मानकों से कम पाए गए चावल की कुल मात्रा, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) और मिश्रित चावल की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट, संबंधित मिलरों पर कार्रवाई तथा भंडारण केंद्रों के निरीक्षण से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।
केंद्रीय सतर्कता दल ने नहीं किया निरीक्षण
RTI के जवाब में FCI ने स्पष्ट किया कि फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) और फोर्टिफाइड चावल से संबंधित परीक्षण रिपोर्ट एवं परिणाम संबंधित मिलर या निर्माता द्वारा FOR TRACE वेबसाइट पर अपलोड किए जाते हैं। इन रिपोर्टों का अवलोकन पूर्व सूचना देकर कार्यालयीन समय में किया जा सकता।)