सूरजपुर दोहरा हत्याकांड: मां-बेटी की हत्या पर कोर्ट का सबसे सख्त फैसला, 3 दोषियों को फांसी; चौथे को आखिरी सांस तक जेल, पीड़ित परिवार ने मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को दिया धन्यवाद

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सूरजपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को मृत्युदंड और चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को मरते दम तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रधान आरक्षक की पत्नी और महज 11 साल की बेटी की निर्मम हत्या से जुड़े इस मामले में अदालत के फैसले ने एक बार फिर अक्टूबर 2024 की उस खौफनाक वारदात की यादें ताजा कर दीं, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। करीब दो साल तक चले मुकदमे के बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में बड़ी राहत माना जा रहा है।

तीन को फांसी, चौथे को जीवन के अंतिम क्षण तक कैद :-

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले में चारों दोषियों की भूमिका और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाई। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को मृत्युदंड दिया गया है। वहीं, आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की ऐसी सजा सुनाई गई है, जिसमें उसे जीवन के अंतिम क्षण तक जेल में रहना होगा।अदालत में सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अभियोजन और पीड़ित पक्ष ने अपराध की गंभीरता, नाबालिग बच्ची की हत्या और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अधिकतम दंड देने की मांग की थी। इससे पहले 29 सितंबर को अदालत चारों आरोपियों को दोषी ठहरा चुकी थी।

13 अक्टूबर की वह रात, जिसने उजाड़ दिया पूरा परिवारयह मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक ड्यूटी पर थे। घर में उनकी पत्नी और 11 वर्षीय बेटी मौजूद थीं। अभियोजन के अनुसार, मुख्य आरोपी अपने साथियों के साथ प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा। आरोपों के मुताबिक, महिला के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद मासूम बच्ची की भी हत्या कर दी गई। वारदात के बाद दोनों के शव वाहन से घर से करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाकर खेत में फेंक दिए गए। रात में ड्यूटी से लौटे प्रधान आरक्षक ने जब घर के भीतर खून के निशान देखे और पत्नी-बेटी को गायब पाया, तो उनकी तलाश शुरू की। अगले दिन दोनों के शव मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

खौलता तेल, तलवार की धमकी और फिर दोहरे हत्याकांड का आरोप :-

इस मामले की पृष्ठभूमि में पुलिसकर्मियों के साथ हुए विवाद का भी जिक्र आया। पुलिस के अनुसार, घटना से कुछ दिन पहले जगराता कार्यक्रम के दौरान मुख्य आरोपी के भाई का कुछ युवकों से विवाद हुआ था। बाद में इसी घटनाक्रम को लेकर पुलिस से नाराजगी की बात सामने आई।

हत्या वाले दिन भी तनाव बढ़ने का घटनाक्रम सामने आया। अभियोजन के मुताबिक, कुलदीप साहू पर एक आरक्षक के ऊपर खौलता तेल डालने और तलवार से हमला करने की धमकी देने का आरोप था। पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह वहां से निकल गया। पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश का आरोप भी सामने आया था।इन्हीं घटनाओं के कुछ घंटे बाद प्रधान आरक्षक के घर में दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिए जाने का मामला सामने आया। जांच के दौरान पुलिस ने चार आरोपियों की भूमिका का पता लगाने का दावा किया और उनके खिलाफ हत्या, दुष्कर्म तथा पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला चलाया।हत्या के बाद भड़का था जनाक्रोश, सड़कों पर उतरे थे लोगमां-बेटी की हत्या की खबर फैलते ही सूरजपुर में भारी आक्रोश देखने को मिला था।

लोग आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए थे। इसी दौरान मुख्य आरोपी के घर और गोदाम के बाहर खड़े वाहनों में आगजनी की घटना भी हुई थी। हालात संभालने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।वारदात के बाद आरोपियों की तलाश में पुलिस ने अभियान चलाया। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी फरार होकर झारखंड की ओर निकल गया था। बाद में बलरामपुर पुलिस ने उसे बस स्टैंड पर बस से उतरते समय गिरफ्तार किया। इसके बाद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।फैसले के बाद भावुक हुआ परिवारअदालत का फैसला सुनते ही पीड़ित परिवार भावुक हो गया। पत्नी और बेटी को खोने के बाद से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार के लिए यह दिन बेहद अहम रहा।

परिजनों ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताते हुए पुलिस विभाग, सहकर्मियों और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।परिवार ने मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा समय-समय पर हालचाल लेने के लिए भी धन्यवाद दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि दोषी पक्ष उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देता है, तो वे भी अपनी कानूनी लड़ाई मजबूती से जारी रखेंगे।फांसी के फैसले के बाद भी बाकी है कानूनी प्रक्रियातीन दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड के मामले में उच्च न्यायालय की पुष्टि समेत निर्धारित कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी है। दोषियों को अपील का अधिकार भी प्राप्त है। ऐसे में निचली अदालत के फैसले के बाद अंतिम न्यायिक निर्णय तक मामला आगे बढ़ सकता है।दूसरी ओर, दोषियों को अंबिकापुर सेंट्रल जेल से रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किए जाने की तैयारी की जानकारी भी सामने आई है।

हालांकि, इस संबंध में जेल प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि और आदेश की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।सूरजपुर का यह फैसला सिर्फ सजा सुनाए जाने की खबर नहीं, बल्कि उस परिवार के लंबे इंतजार का अहम पड़ाव है, जिसने एक ही रात में अपनी पत्नी और मासूम बेटी को खो दिया था। अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि उच्च न्यायालय में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

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