नई दिल्ली। डॉक्टरों और अस्पतालों के नाम पर सोशल मीडिया में चलने वाले भ्रामक विज्ञापनों, बड़े-बड़े दावों और मरीजों को लुभाने वाले प्रचार पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की नई गाइडलाइन के तहत डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के विज्ञापन एवं प्रचार को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं। अब ‘बेस्ट डॉक्टर’, ‘नंबर-1 अस्पताल’, ‘मोस्ट ट्रस्टेड’ और ‘गारंटीड इलाज’ जैसे दावों के जरिए मरीजों को आकर्षित करना नियमों के दायरे में आएगा।

सोशल मीडिया से AI प्रचार तक निगरानी :-
नई गाइडलाइन का दायरा केवल पारंपरिक विज्ञापनों तक सीमित नहीं है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वेबसाइट, व्हाट्सऐप, पॉडकास्ट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए किए जाने वाले प्रचार पर भी नियम लागू होंगे। भ्रामक दावों, फर्जी प्रचार और तकनीक की मदद से तैयार की गई नकली या बदली हुई सामग्री के जरिए मरीजों को प्रभावित करने पर रोक रहेगी।
मरीज की तस्वीर और इलाज के नतीजों का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं :-
मरीजों की तस्वीरें, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, प्रशंसापत्र और इलाज के परिणामों का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
AI की मदद से मरीजों की नकली तस्वीरें या बदले हुए मेडिकल नतीजे तैयार कर प्रचार करना भी प्रतिबंधित होगा। इसका उद्देश्य मरीजों की निजता की रक्षा करना और इलाज के नाम पर भ्रामक दावों को रोकना है।
डिस्काउंट, कैशबैक और मुफ्त इलाज के ऑफर पर भी सख्ती :-
मरीजों को आकर्षित करने के लिए डिस्काउंट, कूपन, कैशबैक, उपहार, रेफरल भुगतान या मुफ्त मेडिकल प्रक्रिया जैसे प्रलोभनों पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू होंगे। यानी चिकित्सा सेवाओं का प्रचार उपभोक्ताओं को लुभाने वाले ऑफर के आधार पर करने की छूट नहीं होगी।क्या अस्पताल अपनी सुविधाओं का प्रचार कर सकेंगे?नई व्यवस्था में तथ्यात्मक जानकारी और व्यावसायिक प्रचार के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। अस्पताल अपनी वेबसाइट पर विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, डॉक्टरों की योग्यता, विशेषज्ञता और शुल्क जैसी जरूरी जानकारियां दे सकेंगे। स्वास्थ्य जागरूकता और जनस्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा करने की भी अनुमति होगी, लेकिन इसे निजी या संस्थागत व्यावसायिक प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जा सकेगा।
नियम तोड़े तो डॉक्टरों पर हो सकती है कार्रवाई :-
गाइडलाइन का उल्लंघन करने पर डॉक्टरों के पंजीकरण के निलंबन सहित अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई और लागू कानूनों के तहत जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में डॉक्टरों, अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल संस्थानों को अपने विज्ञापन, सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट और डिजिटल प्रचार सामग्री की समीक्षा करनी होगी।
मरीजों के हित और पारदर्शिता पर जोर :-
चिकित्सा क्षेत्र में डिजिटल प्रचार तेजी से बढ़ा है। ऐसे में भ्रामक दावों और आकर्षक विज्ञापनों के आधार पर इलाज चुनने वाले मरीजों के हितों की रक्षा करना महत्वपूर्ण है। नई गाइडलाइन का उद्देश्य चिकित्सा पेशे की गरिमा बनाए रखना, मरीजों की निजता सुरक्षित करना और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।