रायपुर/04 अक्टूबर 2026। सेवा निवृत आईआरएस को सीधे 5 साल के लिए विशेष सचिव पद पर संविदा नियुक्ति दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि नियमतः किसी भी रिटायर्ड अधिकारी को संविदा नियुक्ति 1 वर्ष के लिए दी जाती है, कार्य प्रदर्शन के समीक्षा के आधार पर इसे 1-1 वर्ष के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। सेवानिवृत्त अधिकारियों के मामले में अधिकतम 70 वर्ष की आयु तक ही संविदा नियुक्ति को विस्तार दिया जा सकता है लेकिन यदि नियुक्ति किसी मुख्यमंत्री या मंत्रीगण के साथ विशेषाधिकारी या विशेष सचिव के रूप में की जाती है, तो वह नियुक्ति संबंधित मंत्री या मुख्यमंत्री के कार्यकाल के साथ समाप्त मानी जाती है। इस सरकार का कार्यकाल ही महज सवा दो साल बचा है फिर 5 साल के लिए संविदा नियुक्ति आदेश कैसे!प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि आज छत्तीसगढ़ का युवा ठगा हुआ महसूस कर रहा है। भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को पंगु बना दिया है। ‘मोदी की गारंटी’ का ढोल पीटने वाली यह सरकार अब ‘ठेके पर सरकार’चला रही है। विशेष सचिव स्तर के पदों से लेकर विभिन्न विभागों में नियम विरुद्ध संविदा नियुक्तियां की जा रही हैं और आउटसोर्सिंग के जरिए अपने चहेतों को रेवड़ियां बांटी जा रही हैं।

नियमित भर्ती प्रक्रियाओं को ठप कर दिया गया है और पदोन्नति के रास्ते बंद कर दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस प्रशासनिक भ्रष्टाचार और युवाओं के साथ हो रहे अन्याय का पुरजोर विरोध करती है।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार द्वारा नियम विरुद्ध संविदा नियुक्तियों में आउटसोर्सिंग किया जा रहा है। नियमित भर्तियों और प्रमोशन की प्रक्रिया को रोककर अपनों को रेवड़ियां बांटी जा रही है। विशेष सचिव स्तर से लेकर निचले विभागों तक बिना किसी पारदर्शिता के संविदा और आउटसोर्सिंग का खेल खेला जा रहा है।
वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों योग्य युवाओं के भविष्य पर डाका डाला जा रहा है, कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों की पदोन्नति के अवसर छीने जा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था हतोत्साहित हो रही है। इस सरकार की दुर्भावना से प्रदेश के अधिकारी कर्मचारी निराशा हैं।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के योग्य प्रतिभाओं को दरकिनार कर बाहरी एजेंसियों और चहेते अफसरों को उपकृत किया जा रहा है। क्या छत्तीसगढ़ का युवा केवल मोदी के नाम पर दिया जलाएंगे? यहां के कर्मचारी अधिकारी केवल भाजपा के बैनर-पोस्टर लगाने के लिए है? विभागों में नियमित पदों पर आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से भर्ती कराकर किस नेता या अफसर की जेब भरी जा रही है! इस आउटसोर्सिंग खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है! इस सरकार की नीयत साफ है – युवाओं को दो बेरोजगार की लाठी, और अपनों को बांटो संविदा की मलाई! नियम विरुद्ध संविदा का सर्कस तत्काल बंद करे सरकार।