बसंत अग्रवाल के संयोजन में विशाल दही हांडी उत्सव संपन्न, सात पिरामिड बनाकर फोड़ी गई मटकी,35 से अधिक टीमों ने लिया हिस्सा,10 लाख रुपये का पुरस्कार

Uncategorized

रायपुर। राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में आयोजित विशाल दही हांडी उत्सव भक्ति, आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। आयोजन समिति के संयोजक बसंत अग्रवाल के नेतृत्व एवं संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी शामिल हुए। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और आरती के साथ शुरू हुआ आयोजन देर रात तक भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा।इस वर्ष दही हांडी प्रतियोगिता का सबसे बड़ा आकर्षण सात पिरामिड रहा। पुरुष दही हांडी प्रतियोगिता में 35 से अधिक टीमों ने हिस्सा लिया। कई टीमों ने मटकी तक पहुंचने के लिए जोरदार प्रयास किए। अंततः सात पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ने वाली टीम ने बाजी मारी। मटकी में 50 हजार रुपये की नगद राशि रखी गई थी, जबकि विजेता टीम को 10 लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया।

बसंत अग्रवाल के संयोजन में भव्य आयोजन :-

दही हांडी उत्सव को सफल बनाने में आयोजन समिति के संयोजक बसंत अग्रवाल की सक्रिय भूमिका रही। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का स्वागत किया।बसंत अग्रवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सनातन संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस भव्य आयोजन का आयोजन किया गया। दही हांडी केवल मटकी फोड़ने का उत्सव नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, प्रेम, एकता और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है।उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, अतिथियों, कलाकारों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में एकता, भाईचारा और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होती है।

मुख्यमंत्री साय ने की आयोजन की सराहना :-

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने संतों और श्रद्धालुओं का अभिवादन करते हुए छत्तीसगढ़ की धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं का उल्लेख किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ को माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल बताते हुए प्रदेश की धार्मिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख किया।उन्होंने रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ योजना सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लोगों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।मुख्यमंत्री ने महिला दही हांडी प्रतियोगिता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दही हांडी फोड़ने में बेटों के साथ बेटियां भी कंधे से कंधा मिलाकर आगे आ रही हैं, जो समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उदाहरण है।

महिला टीमों ने भी दिखाया दमखम :-

कार्यक्रम की शुरुआत महिला दही हांडी प्रतियोगिता से हुई। महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ दही हांडी फोड़ने का प्रयास किया। मटकी फोड़ने के बाद प्रतिभागियों ने उसमें रखे मक्खन को खाकर जीत का जश्न मनाया।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने महिला विजेता टीम को 2.5 लाख रुपये की नगद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया।सात पिरामिड ने बढ़ाया रोमांचरात करीब 9.40 बजे पुरुष दही हांडी फोड़ी गई। महाराष्ट्र से पहुंची टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया और सात पिरामिड तक पहुंचने में सफलता हासिल की, हालांकि टीम दही हांडी तक नहीं पहुंच सकी। आयोजन समिति की ओर से बसंत अग्रवाल ने महाराष्ट्र की टीम को 21 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया।पिछले वर्ष की विजेता सोनजरी टीम ने भी छह पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। तीन टीमों ने एक साथ मिलकर भी मटकी तक पहुंचने का प्रयास किया। बड़ी संख्या में गोविंदाओं की मौजूदगी से पूरा मैदान रोमांच और उत्साह से भर गया।

बी प्राक, लखबीर सिंह लक्खा और गरिमा स्वर्णा दिवाकर ने बांधा समांआयोजन में मशहूर गायक बी प्राक, अंतरराष्ट्रीय भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा और छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय लोक गायिका गरिमा स्वर्णा दिवाकर की प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहीं।गरिमा स्वर्णा दिवाकर ने अपनी लोक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीता। वहीं बी प्राक की लोकप्रिय प्रस्तुतियों पर युवाओं सहित बड़ी संख्या में दर्शक झूमते नजर आए।

अंतरराष्ट्रीय भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा के मंच पर पहुंचते ही पूरा मैदान जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। उनके भजनों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन में भक्ति, संगीत और छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

सनातन संस्कृति और गौसेवा का संदेश :-

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महंत राजीव लोचन महाराज ने कहा कि गुढ़ियारी का अवधपुरी दही हांडी मैदान आने वाले समय में परिवर्तन की लहर का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि दही हांडी जैसे आयोजनों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में समरसता और सनातन मूल्यों को मजबूत करना भी होना चाहिए।उन्होंने गौसेवा पर जोर देते हुए लोगों को गौमाता के संरक्षण और सेवा के लिए आगे आने का आह्वान किया तथा एक परिवार-एक गाय के संकल्प की दिशा में लोगों को प्रेरित किया।

लोगों ने लिया नशामुक्ति का संकल्प :-

कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने उपस्थित लोगों को नशामुक्ति का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और सकारात्मक समाज के निर्माण के लिए युवाओं को नशे से दूर रखना आवश्यक है। उपस्थित लोगों ने नशामुक्त जीवन अपनाने तथा परिवार और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

सामाजिक समरसता का दिया संदेश :-

नारायण नामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और आचरण से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने सामाजिक भेदभाव समाप्त कर समानता, भाईचारे और मजबूत परिवार की दिशा में काम करने पर जोर दिया।

पूजा-अर्चना से हुआ शुभारंभ :-

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय, पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की धर्मपत्नी वीणा सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।आयोजन में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, ईश्वर साहू, अनुज शर्मा, महापौर मीनल चौबे, संजय श्रीवास्तव, आरडीए अध्यक्ष नंदकुमार साहू, भाजपा प्रदेश महामंत्री अमित साहू, भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष रूपकुमारी चौधरी, भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष राकेश टिकरिहा सहित अनेक अतिथियों की उपस्थिति रही।बसंत अग्रवाल ने जताया आभारआयोजन के सफल समापन के बाद बसंत अग्रवाल ने सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों, कलाकारों, दही हांडी प्रतियोगिता में शामिल टीमों, पुलिस-प्रशासन और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि शहरवासियों के उत्साह और सहयोग ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भी यह आयोजन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और सेवा के संदेश को आगे बढ़ाता रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *