लंबित भुगतान को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदारों का अर्धनग्न प्रदर्शन

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रायपुर :. छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेशभर के ठेकेदारों ने विधानसभा घेराव के दौरान भुगतान करने समेत निर्माण विभागों में व्याप्त विसंगतियां दूर करने अर्धनग्न प्रदर्शन करते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। सभी जगहों से एकजुटता दिखाते हुए नवा रायपुर के धरनास्थल तूता में जुटे। जैसे ही विधानसभा के लिए कूच किए तो बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने 200 मीटर के दायरे में ही रोक दिया। कांट्रेक्टरों के आक्रोश को देखते हुए तगड़ी नाकेबंदी बेरिकेड्स लगाए गए थे। इसके बावजूद एकजुट ठेकेदारों समूह नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों की ओर ध्यान आक​र्षित कराने में जमकर जोर लगाया।

छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने कहा कि शासन-प्रशासन के उदासीन रवैए के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहा है और ठेकेदारों के साथ अन्याय किया जा रहा है। लगातार ज्ञापन और जल जीवन मिशन का घेराव करने के बाद भी लंबित बिल भुगतान की प्रक्रिया तेज नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन ताकत के बल पर विधानसभा का घेराव करने से रोका है। परंतु अपने अ​धिकारों को लेकर एकजुट ठेकेदार आवाज बुलंद करते रहेंगे, जब तक कि समस्याओं का निराकरण नहीं हो जाता है।

दो दिन बाद आगे की रणनीति तय करेंगे
प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन समेत निर्माण विभाग भ्रष्टाचार, भर्राशाही और अफसरशाही चल रही है। बिलों का भुगतान रोककर प्रताडि़त किया जा रहा है। एग्रीमेंट का उल्लंघन किया जाता है। ठेकेदार निर्माण कराने के बाद भुगतान के लिए डेढ़-दो सालों से भटक रहे हैं। दो दिन बाद एसोसिएशन के सभी पदा​धिकारियों और सदस्यों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। ठेकेदार अपने अ​धिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे।

कांट्रेक्टरों की ये हैं प्रमुख मांगें

  • 2200 करोड़ के लंबित पुटअप बिलों का तत्काल भुगतान किया जाए।
  • लगभग 3000 करोड़ के आगामी बिलों के भुगतान का अग्रिम बजट उपलब्ध कराया जाए।
  • एग्रीमेंट के अनुसार रनिंग एवं पार्ट पेमेंट तत्काल शुरू किया जाए।
  • 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद संपूर्ण भुगतान किया जाए।
  • एग्रीमेंट के बाद लागू सभी अतिरिक्त नियम तत्काल समाप्त किए जाएं।
  • आगामी 6 माह के कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए।
  • फंड के अभाव में किसी भी कार्य को प्रभावित न होने दिया जाए।
  • दोषी भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की जाए।
  • ठेकेदारों के साथ अनुबंधानुसार न्यायपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

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