रायपुर : 17 जून2026, महाराष्ट्र विधानसभा के विधायक दल के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कुल अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने कहा है कि यदि महाराष्ट्र से आए अध्ययन दल को धान खरीदी व्यवस्था दिखाई जा रही है, तो सरकार को केवल उपलब्धियां नहीं बल्कि धान खरीदी, भंडारण और परिवहन में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और किसानों की परेशानियों का वास्तविक चित्र भी उनके सामने रखना चाहिए।
धनेंद्र साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रदेश में धान खरीदी केंद्रों, संग्रहण केंद्रों और परिवहन व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि धान के शॉर्टेज, भंडारण में कमी और परिवहन में गड़बड़ियों से राज्य को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं कई मामलों में धान की कमी को “मुसवा (चूहों)” द्वारा नुकसान पहुंचाने जैसे तर्कों से छिपाने की कोशिश की गई।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को अध्ययन दल को यह भी बताना चाहिए कि किसानों को टोकन, पंजीयन, सत्यापन और धान बिक्री की प्रक्रिया में किस प्रकार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के घर-घर जाकर सत्यापन के नाम पर दबाव बनाने और बार-बार प्रक्रियाओं में उलझाने की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद कांग्रेस सरकार ने ही समर्थन मूल्य पर और सहकारी समितियों के माध्यम से धान खरीदी की व्यवस्था लागू की थी, जो किसानों के लिए एक आदर्श मॉडल बनी। इस व्यवस्था ने किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाया और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया।धनेंद्र साहू ने आरोप लगाया कि भाजपा शासनकाल में धान खरीदी व्यवस्था भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की गिरफ्त में चली गई है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से करीब 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है, लेकिन चावल को कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है, जिससे हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में चावल नहीं खरीदे जाने से भी राज्य पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।उन्होंने कहा कि यदि महाराष्ट्र का अध्ययन दल धान खरीदी के चरम सीजन में आता तो उसे किसानों की वास्तविक समस्याएं, धान उठाव में देरी, बारदाने की कमी, भुगतान संबंधी दिक्कतें और सरकारी अव्यवस्थाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देतीं। कई किसान पिछले सीजन में समय पर धान बेचने से भी वंचित रह गए थे।धनेंद्र साहू ने मांग की कि अध्ययन दल के सामने धान खरीदी व्यवस्था की जमीनी हकीकत और किसानों की समस्याओं को भी रखा जाए, ताकि उन्हें यह समझ में आ सके कि व्यवस्था में पारदर्शिता और किसानों के हितों की रक्षा किस प्रकार की जानी चाहिए।
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