रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे रीवा गांव में पेयजल संकट विकराल रूप ले चुका है। हालात ऐसे हैं कि पानी की कमी के कारण कई परिवारों के वैवाहिक रिश्ते तक प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से (40वर्षों से) जल संकट बना हुआ है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका।

गांव के लोगों को पीने का पानी लाने के लिए दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। पानी भरने के लिए रात 2 बजे से ही लोगों की लाइन लग जाती है। भरी दोपहरी हो या अंधेरी रात, ग्रामीणों को हर दिन पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। “हर घर नल जल योजना” के हर घर नल कूप पहुंचाई गई है, मगर पेय जल सप्लाई नहीं।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि चुनाव के समय कांग्रेस और भाजपा के नेता वोट मांगने आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जल संकट की समस्या को भुला दिया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक हर बार आश्वासन की पोटली थमा दी जाती है, लेकिन पानी की समस्या जस की तस बनी रहती है।
इधर, राज्य सरकार इन दिनों करोड़ों रुपये खर्च कर सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनने का दावा कर रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर राजधानी से सटे रीवा गांव के लोगों को पेयजल संकट से मुक्ति दिलाने में प्रशासन और संबंधित विभाग कहां चूक रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब सभी की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर रीवा गांव को बूंद-बूंद पानी के संकट से कब राहत मिलेगी। “राजधानी के दरवाजे पर पीने के पानी के प्यासा गांव रात 2 बजे से पानी की लाइन , नेताओं के वादे बेअसर दिख रहे हैं।
क्षेत्र के विधायक खुशवंत साहेब हैं,या विभागीय मंत्री, सरपंच, पंच बेसुध हैं ।