नकटी बुलडोजर कांड से विधानसभा में हंगामा

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रायपुर: आज विधानसभा मानसून सत्र का तीसरा दिन,आज नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई का मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में जोरदार तरीके से गूंजा। कांग्रेस ने इसे गरीबों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार को घेरा, जबकि सरकार ने कार्रवाई को पूरी तरह वैधानिक बताया। अध्यक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया और गर्भगृह तक पहुंच गया। इसके बाद नियमों के तहत विपक्षी विधायक स्वमेव निलंबित हो गए। देखिए यह रिपोर्ट।

नकटी गांव में 85 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विधानसभा में तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि कई मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे और वहां बिजली, पानी व सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध थीं। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों का समुचित पुनर्वास किए बिना उन्हें बेदखल किया गया। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्रीय सांसद के आश्वासन के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई कर दी।

कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने आरोप लगाया कि विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए गरीबों के घर तोड़े गए। इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि ऐसा कोई दस्तावेज है तो उसे सदन के पटल पर रखा जाए।सरकार की ओर से राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि जांच में भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया था और वर्ष 2025 में बेदखली का आदेश जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों को सामान हटाने का समय दिया गया और नवा रायपुर के सेक्टर-30 में फ्लैट देकर उनका पुनर्वास किया गया है।बाइट: टंक राम वर्मा, राजस्व मंत्रीवीओ-3राजस्व मंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया। इससे नाराज कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह तक पहुंच गए। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई और नियमों के तहत विपक्षी विधायक स्वमेव निलंबित हो गए।इस दौरान भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए चेरीखेड़ी विस्थापन का मुद्दा उठाया और कहा कि कांग्रेस को गरीबों की चिंता करने से पहले अपने कार्यकाल को याद करना चाहिए।

समापननकटी गांव की बुलडोजर कार्रवाई अब विधानसभा से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। विपक्ष इसे गरीबों के अधिकारों का सवाल बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और प्रभावितों के पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। अब इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के संकेत हैं।

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