मीसा बंदियों के आश्रितों को पेंशन देना जनता के धन की बर्बादी है : सुरेंद्र वर्मा प्रवक्ता कांग्रेस

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रायपुर/27 मई 2026। “छत्तीसगढ़ लोकतंत्र सेनानी सम्मान नियम 2026“ के तहत मीसाबंदियों के आश्रितों को पेंशन देने के निर्णय पर सवाल उठाते हुये प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो के आश्रितो को पेंशन नहीं मिलता तो मिसा बंदियो के परिजनों को पेंशन देना कहां तक उचित है? भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ को संघियो का चारागाह बनाया जा रहा है, सरकारी खजाने को संघ समर्थित मीसा बंदियों पर लुटाने के बाद अब उनके आश्रितों पर मेहरबानी दिखा रही है सरकार। मीसाबंदी राजनीतिक रूप से सरकार का विरोध कर रहे थे। उन्हें पेंशन देने के बाद अब उनके आश्रितों को भी पारिवारिक पेंशन देने की क्या आवश्यकता? क्या जनता की गाढ़ी कमाई भाजपा के समर्थित लोगों पर खर्च करने के लिये है?प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पंचायतों को मूलभूत सुविधाओं के लिए राशि नहीं दी जा रही, नगरीय निकाय फंड की कमी से जूझ रहे हैं, अनियमित और संविदा कर्मचारी नौकरी से निकाले जा रहे, बिजली के दाम बढ़ा दिए गए हर वर्ग इस सरकार के वसूली नीति से परेशान है, वित्तीय संकट बता कर जनता को लुटा जा रहा है, फिर मीसा बंदियों को करोड़ो रुपया पेंशन और उनके आश्रितों को भी पेंशन देने की क्या आवश्यकता है? भाजपा सरकारी खजाने से अपने समर्थित लोगो को पाल रही है। यह प्रदेश की जनता के साथ अन्याय है।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि एक ओर सरकार कर्ज पर कर्ज ले रही है, कर्मचारियों को वेतन देने की स्थिति में नही है, सारे विकास काम वित्तिय संकट के चलते बंद है, सड़क खराब है, सरकारी अस्पताल में सुविधाओं जांच, इलाज और दवा की कमी है, शिक्षा व्यवस्था बेहद खराब है, शिक्षकों की कमी समय पर पुस्तक, गणवेश, सायकल वितरण नही हुआ छात्रवृत्ति नही मिला, किसानों को खाद नहीं मिल रहा, प्रदेश के युवाओं को न रोजगार दे पा रही है न बेरोजगारी भत्ता दे रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के दौरान शुरू की गई शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक बीमा योजना तक इस सरकार ने बंद कर दिया है, लेकिन संघियों को लुटाने के लिए धन है?प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके भाजपा सरकार ने अपने सैकड़ों राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाला है, झूठे मामले दर्ज किए है।

रमन सरकार के दौरान सैकड़ो निर्दाेष आदिवासियों को सालो तक जेल में बंद रखा गया, उनका भविष्य खराब किया और आज भी छत्तीसगढ़ में चार हजार से अधिक आदिवासियों को नक्सलियों का सहयोगी होने का फर्जी आरोप लगाकर जेल में बंद किया गया है, अब जब दुर्दांत नक्सलियों को सरकारी मेहमान बना लिया गया है, उनके सारे अपराध और गुनाह माफ कर दिए गए हैं तो निर्दाेष आदिवासीयो को रिहा कब करेगी और क्या भाजपा सरकार उन्हें भी पेंशन देगी? जो खुद को लोकतंत्र के तथाकथित सेनानी बताते है क्या वो बतायेंगे भाजपा की सरकार लोकतंत्र की गला घोंट रही है उसका विरोध कर पाएंगे?। वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून तो संविधान का भाग है जिसको कुचलने का काम यह सरकार कर रही है इस पर तथाकथित लोकतंत्र के सेनानी मौन क्यों है? क्या भाजपा आरएसएस समर्थित लोकतंत्र अलग है? संघ समर्थित तथाकथित लोकतंत्र सेनानियों पर जनता की पैसों की बंद करें, केवल आम जनता के हित में सरकारी खजाने का उपयोग किया जाये।

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