लैलूंगा में ओवरलोड वाहनों का खुला खेल,‘सेटिंग सिस्टम’ और RTO की चुप्पी

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लैलूंगा/रायगढ़ : रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र में परिवहन विभाग (RTO) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। RTO अधिकारी आशीष देवांगन सिर्फ बड़ी बड़ी बातें और दावे फेल। सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड ट्रक और नियमों को खुली चुनौती देते वाहन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां कानून नहीं, बल्कि ‘सेटिंग सिस्टम’ हावी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं है।

चेकिंग सिर्फ दिखावा, ओवरलोड वाहनों को खुली छूट! :-

क्षेत्र में अक्सर RTO की गाड़ियां सड़क किनारे दिखाई देती हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उनके सामने से ही ऊंचाई तक माल से लदे भारी वाहन बेखौफ गुजर जाते हैं। लोगों का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ छोटे वाहनों या बाहर से आने वाले ट्रकों पर होती है, जबकि स्थानीय सिंडिकेट से जुड़े वाहनों को खुला संरक्षण मिला हुआ है।

सड़कें टूटीं, हादसे बढ़े, लेकिन जिम्मेदार मौन :-

ओवरलोडिंग के कारण लैलूंगा और आसपास की ग्रामीण सड़कें बदहाल हो चुकी हैं। भारी वाहनों के दबाव से सड़कें समय से पहले टूट रही हैं और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। क्षमता से कई गुना ज्यादा माल लेकर चल रहे ये ट्रक किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।

सरकार को करोड़ों का नुकसान, अफसरों की जेबें गर्म :-

जहां एक ओर ओवरलोडिंग से शासन को लाखों-करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या सब कुछ ‘मंथली सेटिंग’ के भरोसे चल रहा है !

न सुरक्षा, न नियमों का पालन :-

इन ट्रकों में न तो सुरक्षा मानकों का पालन होता है और न ही जरूरी रेडियम टेप या चेतावनी संकेत लगाए जाते हैं। पीछे ‘Horn Please’ और ‘Wait For Side’ लिखकर जिम्मेदारी पूरी कर दी जाती है, जबकि हकीकत में ये वाहन सड़क पर चलने वालों के लिए खतरा बन चुके हैं।

लैलूंगा में RTO विभाग की इस संदिग्ध कार्यशैली को लेकर अब उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ओवरलोड वाहनों पर लगाम नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

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